20171112

धनक द रेम्बों का अवार्ड सेरेमनी के साथ हुआ समापन

धनक द रेम्बों का अवार्ड सेरेमनी के साथ हुआ समापन
मूमल नेटवर्क, भिवाड़ी। ऑल इण्डिया लेवल की पेंटिंग एग्जीबिशन और ऑन द स्पॉट पेंटिंग काम्पीटिशन के तीन दिवसीय कार्यक्रम धनक द रेम्बों का कल अवार्ड सेरेमनी के साथ समापन हुआ।। शहर के बीएमए हॉल में चल रहे इस कार्यक्रम में बच्चों के साथ वरिष्ठ चित्रकारों ने भी कलाकृतियों में रंग भरे।

समारोह के प्रमुख आयोजक मोहिन्दर सिंह ने बताया कि, तीन दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम में भारत के विभिन्न हिस्सों से आई पेंटिंग्स का प्रदर्शन किया गया साथ ही ऑन द स्पॉट पेंटिंग प्रतियोगिता का भी आयोजन हुआ। इस प्रतियोगिता में दो श्रेणियों के तहत लगभग 150 बच्चों ने रंगों से अपनी कल्पनाओं की दुनिया सजाई। इसमें आठवीं कक्षा तक के बच्चों ने 'सेव वॉटर, सेव द अर्थ' तथा नवीं से बारहवीं कक्षा तक के बच्चों ने 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' विषय पर चित्र बनाएं। समापन अवसर पर श्रेष्ठ कृतियों को अवार्ड से सम्मानित किया गया। बच्चों के हुनर के साथ वरिष्ठ चित्रकारों की अंगुलिओं से अध्यात्म पर निखरती आकृतियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में शहर के लोग उपस्थित थे। वरिष्ठ चित्रकारों में प्रमुख रूप से संदीप रावल, राजेश चाहरेश् हितेन्द्र शाक्य, एस.के. राजोटिया, राहुल पगारे, प्रिंस राज, कृष्ण कुंडारा, रामश्री, जसवंत सिंह आदि शामिल थे।




20171031

Art Jaipur, आर्ट जयपुर


खुलासा 'आर्ट जयपुर' का
कला बिरादरी में बड़े पैमाने पर होने जा रहा एक आयोजन खड़े होने से पहले ही क्यों ढह गया? कौन सी राजनीति ने इसे तबाह किया। कौन-कौन थे इस आयोजन के पीछे जानने के लिए जानिए मूमल का यह खोजी खुलासा।  
जयपुर के कला फलक पर देस-विदेस के कलाकारों के साथ व्यावसायिक स्तर का एक आयोजन करने के लिए पिछले वर्ष 2016 में एक पार्टनरशिप फर्म 'टर्कुइस एन्टरप्राइजेज' का गठन किया गया। इस फर्म में जयपुर की दिशेका जाखड़ और रुपिन रावत पार्टनर बने। इसका उल्लेख ट्रेड मार्क जर्नल में किया गया है। इसी फर्म का आयोजन था 'आर्ट जयपुर।'
कलाकारों व मीडिया या सम्बन्धित लोगों को आर्ट जयपुर की तरफ  से भेजी गई मेल में जो नाम सबसे पहले लोगों के सामने आया वह सुजाता घोषाल का था। मीडिया प्रभारी के रूप में गौरव व लोगो से सम्पर्क करने के लिए देशिका जाखड़ की पहल रही। इसके साथ ही नमिता जोसफ  का भी नाम था जो सिडनी निवासी एक क्रिएटिव राइटर ब्लॉगर हैं।
 आयोजनकर्ता एवं फर्म 'टर्कुइस एन्टरप्राइजेज' के पार्टनर के रूप में रुपिन रावत की ओर से कलाकारों को भेजी गई मेल में आयोजन में सम्मिलित होने के लिए कलाकारों द्वारा भरी जाने वाली एप्लीकेशन, नियम व कला प्रदर्शन के लिए दी जाने वाली स्टॉल के आकार व किराया राशि का उल्लेख था।
इस प्रपत्र में आर्ट जयपुर में भाग लेने वाले कलाकारों के रूप में जयपुर के अनेक कलाकारों के नाम शामिल किए गए थे। मूमल द्वारा इन कलाकारों से सम्पर्क करने पर अधिकांश ने इसकी जानकारी होने तक से इन्कार किया था। जबकि आयोजकों के अनुसार सभी ने उन्हें सहभागिता का आश्वासन दिया था।
कौन हैं? दिशेका जाखड़।

दिशेका जाखड़ जयपुर की एक युवा आर्ट कयूरेटर कही जा सकती हैें। कुछ समय पूर्व जयरंगम जैसे आयोजन में विज्युअल आर्ट के लिए किए जाने वाले प्रदर्शन में यह वरिष्ठ कलाकार विनय शर्मा के साथ सहयोगी के रूप में सक्रिय नजर आईं थीं। अकादमिक क्षेत्र में एल.एल.बी. की उपाधि के बाद ये इवेन्ट्स और खासकर आर्टवर्ड में अधिक सक्रिय हुई।
जो भी हो कला आयोजन के क्षेत्र में दिशेका जाखड़  ने एक साहसिक स्वप्र देखा। उसे साकार करने की दिशा में भी भरसक प्रयास किए, इससे इन्कार नहीं किया जा सकता। आयोजन की विफलता के पीछे जिस राजनीति का उल्लेख किया जा रहा है, समय के साथ इस राजनीति और इससे जुड़े चेहरे भी बेनकाब होंगे। फिलहाल दिशेका जाखड़ शायद शॉक्ड है, इसलिए सच उजागर होने तक प्रतीक्षा करनी होगी।
प्रमुख सम्बद्ध:
किशोर शंकर चावला (आर्ट इन्फो इण्डिया)
आर्ट इन्फो इण्डिया पोस्पोण्ड हुए आयोजन आर्ट जयपुर का सहयोगी है।
आर्ट इन्फो इण्डिया गुडगांव में स्थिति है। जिसका गठन चण्डीगढ़ यूनिवर्सिटी से बीएफए डिग्री प्राप्त किशोर शंकर चावला ने किया। आर्ट इन्फो इण्डिया का गठन कला के क्षेत्र में कार्य करने वालो को बढ़ावा देने और उनके सपनों के साकार करने के लिए किया गया है।
आर्ट इन्फो इण्डिया का कथन है कि 'हम कला के क्षेत्र में आर्ट गैलरी, नीलामी घरों, कला विद्यालयों / संस्थानों, गैर सरकारी संगठनों, ऑनलाइन सेवाएं / वेबसाइट्स, कला प्रकाशन / पुस्तकें, कलाकारों और कला समाचार आदि में कला आयोजनों / प्रदर्शनियों, पुरस्कार / छात्रवृत्ति पर जानकारी भी प्रदान करते हैं।'
चित्रकार राधा बिनोद शर्मा
आर्ट जयपुर का एक और प्रमुख सहयोगी हैं आईएमए फाउण्डेशन के फाउण्डर चित्रकार राधा बिनोद शर्मा। यह वही आर्टिस्ट है जिसकी कृति पर बीते साल जयपुर आर्ट समिट में विवाद खड़ा किया गया था।
अन्य सम्बद्ध:
आर्ट जयपुर की ओर से जारी सहभागिता करने वाले कलाकारों की प्रथम सूचि में शामिल कुछ नामों के साथ ही जानकारों की ओर से संकेत मिलने लगे थे कि आयोजन में राजनीति के 'वायरस' एक्टिव हो सकते हैं। यह वायरस पूरे कला जगत के एक आयोजन को ही तबाह कर देंगे यह शायद आयोजकों ने नहीं सोचा होगा।

आर्ट जयपुर का आयोजन खटाई में
मूमल नेटवर्क।  29 अक्टूबर।  जयपुर में 2 नवम्बर से बड़े स्तर पर होने वाला आर्ट जयपुर का आयोजन खटाई में पड़ता नजर आ रहा है। आयोजन के मीडिया प्रभारी के अनुसार इस संबंध में अगले एक-दो दिन में स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
आयोजन के स्थगित होने का पहला संकेत जयपुर के सीतापुरा स्थित जेईसीसी ग्राउण्ड में छाए सन्नाटे से मिला। जहां दो दिन बाद इतना बड़ा आयोजन होने वाला है वहां अभी तैयारी की कोई गतिविधियां नजर नहीं आ रही। आर्ट जयपुर की अधिकृत वेब साइट रखरखाव के नाम पर बंद कर दी गई है। उधर आयोजन की दो प्रमुख समन्वयकों को टेलीफोन 'नो रिप्लाय' वाले मोड पर है।
आयोजन के मीडिया प्रबंध से जुड़े गौरव ने फोन उठाया तो कहा कि कुछ राजनीतिक परिस्थियों मेें एकाएक हुए बदलाव के कारण हालात उनके नियंत्रण से बाहर हो गए हैं। ऐसे में आयोजन को फिलहाल स्थगित करना पड़ रहा है। इस संबंध में अंतिम रूप से अपने अधिकारियों से चर्चा करने के बाद ही स्थगन की पुष्ठि कर सकेंगे। साथ ही यह भी उम्मीद जताई गई है कि हालात में सुधार होने के बाद शीध्र ही यह आयोजन किया जाएगा।

20171028

एक कला शिखक का कला संकल्प

एक कला शिखक का कला संकल्प

प्रकृति को बनाया कैनवास
कला को जोड़ा गांवों से

मूमल नेटवर्क, पाली। कला शिक्षक नवलसिंह चौहान ने शहर में कला की शिक्षा प्राप्त की और अपनी जन्मभूमि, अपने गांवों को अपनी कला से जोड़कर एक उदाहरण पेश किया है। प्रकृति को अपनी कृतियों से साक्षात्कार करवाकर नवलसिंह ने प्रकृति से वास्तव में जुडऩे का संदेश दिया है। ना केवल इतना ही कला खरीददारों का एक नया बाजार और वर्ग भी तैयार किया है।
प्रति वर्ष जून की चौदह तारीख नवलसिंह के लिए खास होती है। पिछले तीन वर्षों से वो इसी खास दिन पर अपनी पेंटिंग्स का प्रदर्शन किसी ना किसी विशेष अन्दाज से करते हैं। प्रदर्शनी स्थल जरूर गांव ही होता है।
2015 की 14 जून को इस कलाकार ने अपनी कृतियों की प्रदर्शनी स्कूल में लगाकर ना केवल विद्याार्थियों को कला के प्रति आकर्षित किया वरन् स्कूल अध्यापकों के साथ हर श्रेणी वर्ग के लोगों को इससे जोडऩे का प्रयास किया। दूसरी प्रदर्शनी राजस्थान के पाली स्थित कोट किराना पंचायत के अपने गांव भेरू कासियां में लगाई। आर्ट गैलेरी की दीवारे बनी खेजड़ी के पेड़। पहली बार हुए इस आयोजन से जहां गांव वाल अभिभूत हुए वहीं समाज को प्रकृति संजोकर रखने का भी संदेश मिला अपनी इस प्रदर्शनी में नवलसिंह ने 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' का भी संदेश प्रसारित किया।

नवलसिंह की तीसरी पेंटिंग इसी वर्ष 2017 की 14 जून को  24 मील, नेशनल हाईवे नं.-8 पर राजस्थान के जस्साखेड़ा भीम के पास बने एनीकेट में लगी। एनीकेट का पानी बना आर्ट गैलेरी जिसमें इस कलाकार ने अपनी पेंटिंग्स को पानी में तैरने के लिए प्रकृति के सानिध्य में स्वछन्द छोड़ दिया था। प्रयास नया व अनूठा था था जो दर्शकों को खींचकर लाने में सफल हुआ। इतना ही नहीं कला व कलाकार को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से युवा नेता परमेश्वर सिंह सीरमा ने पेंटिंग खरीदी। इस प्रदर्शनी में दीप प्रज्जवलन के साथ उपस्थित जनसमूह ने पानी में पेंटिंग्स तैराकर कला का साथी होने का संकेत दिया।
नवल सिंह की रेखाएं कला प्रेमियों को लुभाने में सक्षम हैं और कला को जनमानस तक पहुंचाने का प्रयास अतुलनीय। अगला वर्ष 2018 नवलसिंह चौहान के किस अन्दाज में कला का यह पर्व मनाने के लिए आ रहा है, यह अभी तय नहीं हो पाया है। ...हां यह जरूर तय है कि जो होगा कुछ नया, कुछ अनूठा और गांव समाज को एकसाथ लेकर चलने वाला होगा।

20171027

Jaipur Kala Choupal, जयपुर कला चौपाल

'जयपुर कला चौपाल' की पृष्टभूमि व संतुलित खुलासा।
कला आयोजनों में भाग लेने से पूर्व अगर यह जान लिया जाए कि आयोजकों की असल मंशा क्या है, तो अच्छा रहता है। कलाकारों के लिए आयोजन और आयोजक की पृष्ठभूमि जानना भी जरूरी है। इसलिए पेश है 'जयपुर कला चौपाल' का संतुलित खुलासा।
शुद्ध व्यावसायिक गतिविधि 
जयपुर में चल रहा आयोजन 'कला चौपाल' शुद्ध व्यावसायिक गतिविधि है। इस आयोजन के लिए रजिस्ट्रार ऑफ  कम्पनीज जयपुर के पास 31 मार्च 2017 को पार्टनरशिप फर्म का रजिस्ट्रेशन एक लाख रुपए की ओब्लिगेशन कन्टरीब्यूशन राशि से करवाया गया। इस फर्म के चार पार्टनर हैं- ज्योतिका राम प्रताप सिंह एवं राम प्रताप सिंह के सुपुत्र राघव प्रताप सिंह, रूद्र प्रताप सिंह, आर्टिस्ट प्रेमिला सिंह एवं ग्राफ्रिक डिजाईनर तथा सर्व शिक्षा व पल्स पोलियो अभियान से जुड़ी  लीनिका बेरी जैकब। इस फर्म का रजिस्टर्ड आफिस बी-5, नन्द प्लाजा, गीजगढ़ हाउस, हवा सड़क, जयपुर में है।
इसी एडरेस पर एक और कम्पनी 14 सितम्बर 2016 को गठित हुई थी। सीमित दायित्व वाली इस कम्पनी को भी एक लाख रुपए की पूंजी से आरम्भ किया गया। कम्पनी के दो डायरेक्टर हैं- राघव प्रताप सिंह तथा रूद्र प्रताप सिंह।
संचालन के लिए चार पार्टनर्स
विशुद्ध व्यावसायिक स्तर पर आयोजित किये गए इस कार्यक्रम के संचालन के लिए चार पार्टनर्स की एक कम्पनी गठित की गई है। व्यावसायिक लाभ के लिए कला व पर्यटन को आपस में जोड़ा गया है। देसी-विदेसी पर्यटकों को इस कार्यक्रम को देखने के लिए न्यौता दिया जा रहा है जिसमें पर्यटकों के लिये उनके अपने खर्चे पर होटल्स में ठहराने की व्यवस्था का प्रस्ताव भी शामिल है।

टिकट लगभग 3500 रुपये
इसके साथ ही रेजीडेंसी प्रोगाम की समाप्ति पर कला प्रदर्शनी के उद्घाटन व समापन अवसर पर डिग्गी पैलेस में आयोजित होने वाली सेरेमनीज के लिए टिकट बुक की जा रही है। यह टिकट लगभग 3500 रुपये प्रति व्यक्ति है जिसमें म्यूजिकल नाईट के आनन्द के साथ ड्रिंक और डिनर परोसा जाएगा।
कला चौपाल के आयोजनों में सहयोगयों के रूप में कला का व्यवसाय करने वाली 8 एक्स्पोर्ट कम्पनियां जुड़ी हुई हैं। इनमें जयपुर रग्स, ओजस, कागजी, आयाम, नीरजा पोटरी, स्टूडियो सुकृति, स्टाईल स्कूल व पूनम भगत का ताइका शामिल है।
खामोश सी शुरुआत
20 अक्टूबर 20017 को आरम्भ हुए रेजीडेंसी आयोजन 'कला चौपाल' की खामोश सी शुरुआत के बाद अब तक सन्नाटा पसरा है। आयोजनों की श्रृंखला में सबसे लम्बी अवधि तक चलने वाला इस कार्यक्रम में आम दर्शकों के लिए है भी नहीं। इसका कारण इसकी अवधि का लम्बा होना तो है साथ ही ऊंची टिकट दर भी है। इसके साथ ही रेजीडेंसी के दौरान तैयार कृतियों का प्रदर्शन जेकेके में किए जाने की घोषणा भी एक अहम कारण है। कला प्रेमी इस प्रदर्शनी को देखने के लिए प्रतीक्षारत हैं।
आयोजकों का कहना है कि....
आयोजकों के अनुसार इसमें 15 राष्ट्रों के लगभग 50 आर्टिस्ट शामिल हुए हैं। 'अवर बॉडी एण्ड अवर हैण्डस इन वॉटर' थीम पर आधारित इस कार्यक्रम के बारे में आयोजकों का कहना है कि 'यह कार्यक्रम विभिन्न देशों के स्थापित और उभरते कलाकारों को भारत की कलाओं और कलाकारों की आत्मा का दर्शन करने के लिए एक अनूठा अवसर प्रदान करेगा। इसके साथ ही, अंतर्राष्ट्रीय कलाकारों की कलात्मक अभिव्यक्ति की समकालीन शैलियों पर समझ बढ़ाने के लिए, एक वैश्विक कलात्मक समुदाय के साथ बातचीत करने के लिए भारतीय कलाकारों को एक बहुत ही अच्छा मौका मिलेगा।'
विशेष...
सभी आयोजनों के बारे मेें विस्तार से जानकारी देने के लिए मूमल ने विशेष व्यवस्था की है। इसे जानने के लिए मूमल के वेब पोर्टल www.moomalartnews.com पर पधारें। वहां दायीं ओर एक विन्डों में सभी आयोजनों के लिंक उपलब्ध हैं। इन्हें क्लिक करने पर जानकारियों से भरपूर मूमल की बेबाक समीक्षा पढऩे के साथ आयोजन की वेब साइट और अन्य लिंक तक पहुंचने की सुविधा भी मिलेगी।

20161202

JAIPUR ART SUMMIT 2016 (4th Edition)

खंड-खंड  सी विशाल परिकल्पना   फोटो डॉ. ललित भारतीय 
जयपुर आर्ट समिट; बड़ा सा कैनवास, बिखरे से रंग   
जयपुर आर्ट समिट के बाद संबंधित लोगों के असली आचार-विचार को जानने और 
उन्हें समेट कर संजीदा पाठकों के लिए संतुलित करने में समय लगता ही है। 
...तो देर से ही सही, एक दुरुस्त समीक्षा, जिसे कला जगत के जुड़े गम्भीर कला प्रेमियों को जरूर जानना चाहिए।
अपने जीर्णोद्धार की प्रक्रिया से गुजरते हुए एक अर्से से सुनसान पड़ा जयपुर का रवीन्द्र मंच पिछले दिनों जयपुर आर्ट समिट के रंगों से सजकर फिर जीवन्त हो उठा।
लेकिन, रवीन्द्र मंच में शहर की सांस्कृतिक धडक़न को जीने वाले प्रशंसकों को इसकी खबर नहीं हुई।
इस साल समिट का चौथा एडीशन बीते तीन वर्षों में हुए आयोजन के मुकाबले ज्यादा बड़े कैनवास पर था। 
पांच दिन में 25 देशों के विदेशी कलाकारों सहित 478 प्रतिभागी कलाकारों के 593 काम। कला चर्चा के तहत 22 वक्ताओं की गुफ्तगू। समानान्तर चलते 3 कला शिविरों सहित 4 भित्तिचित्रांकन। 9 कला फिल्मों सहित 4 जीवन्त प्रदर्शन। गीत-संगीत, खान-पान और इनके कई साइड अफेक्ट सहित काफी कुछ था। 
यह बात अलग है कि सब इतना बिखरा-बिखरा था कि कहीं भी अपना पूरा प्रभाव नहीं छोड़ पाया।
जितना था उसका सबसे प्रभावी पहलू था, देश-विदेश की कुछ पारम्परिक कलाओं का प्रदर्शन। 
यहां आर्ट और क्राफ्ट के बीच की बारीक रेखा को या यूं कहें भारत सरकार द्वारा बनाई गई विभाजन रेखा को मिटाकर एक ही छत के नीचे समग्र कला का प्रदर्शन प्रशंसनीय था। समिट के मुख्य आयोजन प्रांगण के साथ अन्य अनेक स्थानों पर भी आयोजन की कडिय़ा जोडऩे का प्रयास किया गया।
अपनी कमजोरियों को ही अपनी ताकत बना कर प्रस्तुत करना कोर्पोरेट कल्चर की अपनी कला है। 
यहां भी वह कला देखने को मिली। 
जवाहर कला केन्द्र से निकलकर रवीन्द्र मंच को समिट के नए वेन्यू के रूप में प्रस्तुत किया गया। 
समिट के आयोजन को रवीन्द्र मंच सोसायटी का पूरा सहयोग नि:शुल्क मिला। 
शुल्क वसूला जाता तो वह लगभग 11 लाख रुपए होता।
सरकारी कला संस्कृति फंड से 4 लाख की आर्थिक स्वीकृति भी।
लेकिन, समिट की कम्पनी के सहयोगियों में सरकारी पक्ष नाम नदारत रहा।
संभव है सरकारी सहयोग कम्पनी के बजाय फाउंडेशन को मिला हो।
फिर भी सब कुछ सुखद था, लेकिन विशाल कैनवास पर बुने गए आयोजन को प्रभावशाली तरीके से सम्पन्न करवाना समिट आयोजकों के लिए मुश्किल साबित हुआ और विस्तार के लिए जोड़ी गई आयोजन की कडिय़ां बिखरती चली गई।
इस कदर बिखरी कि एक ही राजघराने में राजकुमारी से राजमाता होने जा रही दीया कुमारी जैसी आर्ट कलेक्टर से भी आयोजन का एक बड़ा और अहम हिस्सा छूट गया।
खास आगुंतकों में यही एक मात्र नाम उल्लेखनीय रहा, बस! 
ऐसे में आयोजक पनिहारों के लिए पनघट की डगर तो कठिन रही ही... कला के रसिक प्रेमी भी ठगे से रह गए। मानों कला रस की आसमानी बूंदों के प्यासे लम्बी चौंच वाले चकोरों को बड़े से थाल में फैलाकर पानी परोसा गया हो।
नतीजा यह कि दर्शकों का अभाव मुख्य मुद्दा रहा, इससे प्रतिभागी कलाकारों ने स्वयं को ठगा सा महसूस किया। कई सपने टूटे। खासकर सेल के।
वैसे तो ऐसे कला आयोजन होते ही सपने बेचने के लिए हैं। आयोजन सरकारी हो या निजी। कलाकारों द्वारा आयोजित हो या उन्हें दरकिनार करते हुए कोई कम्पनी कर रही हो। कहीं रंगों के सपने बिकते हैं, तो कहीं सपनों के रंग। कुल मिलाकर सफलता के सपनों की तिजारत होती है। 
जयपुर आर्ट समिट के फाउंडर डायरेक्टर शैलेंद्र भट्ट का सपना है कि... 
कला व कलाकारों की मजबूती की दिशा में प्रोफेशनल्स और आर्टिस्ट की सोच को मिला कर काम हो। 
कला निवेश व कलेक्शन केवल बड़े औद्योगिक घरानों के बूते से बाहर आए।
जयपुर में आर्ट प्रमोटर ही नहीं आर्ट इंवेस्टर्स का भी मनोबल बढ़े।
कला में निवेश करने वाले यहां भी है...।
जानकारों के अनुसार लब्बो लुआब यह कि कला को मिलकर कैश किया जाए।
किसी परिचय के निराश्रित आयोजन के एक अन्य स्तम्भ आर.बी. गौतम का सपना है कि...
समिट कला की सभी विधाओं को मंच प्रदान करते हुए कला उत्थान करे।
कलाकारों को रिसर्च वर्क करने के साथ स्टडी मैटेरियल भी मिले।
यहां आयोजकों की पैनी सोच और प्रस्तुत सपनों में सब शामिल हैं, नहीं है तो बस आम कलाप्रेमी।
वह कला प्रशंसक वर्ग जो कला को सम्मान भी देता है और सराहना भी।
लेकिन, यह वर्ग कला के लिए कैशलेस है। 
इसलिए कलाकार और कम्पनी दोनों के लिए यह फालतू वर्ग अवांछित है।
कायदे से बुलाया नहीं तो यह खुद्दार वर्ग आयोजन में नजर भी नहीं आया।
...और इससे किसी को कोई फर्क भी नहीं पड़ा। 
प्रतिभागी कलाकारों को इससे  जरूर फर्क पड़ा कि ‘काम के लोग’ भी नहीं आए।
कलाकारों का कहना था कि आयोजन स्थल परिवर्तन करने के साथ आयोजकों को इस नई जगह का जितना प्रचार करना चाहिए था... उतना नहीं किया गया। 
आर्ट समिट दर्शकों के रूप में एक दिन कुछ स्कूली बच्चे जरूर आए जो समिट जैसे बौद्धिक आयोजन के लिए किसी भी रूप से पर्याप्त नहीं थे। 
जो कुछ लोग आए भी तो उन्हें कोई यह बताने वाला नहीं था कि कौन सी चीज कहां डिस्प्ले की गई है?
...या ग्राउण्ड के अलावा पहली, दूसरी मंजिल के साथ बेसमेंट में भी देखे जाने के लिए बहुत कुछ है।
बात डिस्प्ले की चली तो प्रतिभागी कलाकारों का एक बड़ा समूह इससे भी नाखुश था। उनका कहना था कि कलाकृतियों की ऐसी भरमार देखकर लगता था कि कृति चयन को पूरी तरह नजर अंदाज किया गया। 
एक कलाकार ने यहां तक कहा कि आर्ट सलेक्शन का आधार रेवेन्यू कलक्शन और रिलेशन फै्रक्शन अधिक रहा। कम्पनी में अब मात्र दो कलाकार शेष हैं और वे भी जितना कर सकते थे, वह किया।
अराजकता का आलम यह कि मुख्य आयोजन स्थल के परे जो कला शिविर हुए उनके प्रतिभागियों के नाम व काम अन्तिम दिन तक नहीं बताए जा सके। जानकारों का कहना था कि विभिन्न शिविरों व अन्य कलाकर्म में कई कलाकारों को रिपीट किया गया।
आर्ट समिट के लिए कारीगरों की तरह काम करने वाले कलाकारों के लिए इतनी बख्शीस का हक तो बनता है। 
रवीन्द्र मंच पर आयोजित पांच दिवसीय कला शिविरों में तैयार कृतियां भी समिट के समापन तक प्रदर्शित नहीं की जा सकी। दो बाहरी परिसरों में तैयार कलाकृतियां तो उन परिसरों से बाहर ही नहीं निकल सकीं।
बच्चों के वर्कशॉप में तैयार कृतियों का भी केवल एक हिस्सा ही प्रदर्शित हो सका। 
कलाकार कैटलॉग से भी नाराज नजर आए... कि आयोजकों द्वारा किए गए वादे के अनुरूप उनका पर्याप्त परिचय उसमें नहीं दिया गया। कई कलाकारों के शहर व राज्य के नाम भी गलत छापे गए।
आयोजकों का कहना है कि उनके अनुरोध के बाद भी सब कलाकारों ने  पूरी जानकारी नहीं दी, जिसने जितनी और जो जानकारी दी वही प्रकाशित की गई।
उद्घाटन से लेकर समापन तक समिट के कई डायरेक्टर व सलाहकार सहयोगी अनुपस्थित रहे। 
दूसरी और जो समिट के वास्तविक सहयोगी उपस्थित रहे उन्हें नजरअन्दाज किया गया।
फोटो डॉ. ललित भारतीय 

इस साल समिट में खान-पान का बढ़ा हुआ दायरा व स्तर सुखद था।
दोपहर वाले भोज के लिए जयपुर के प्रसिद्ध प्रतिष्ठानों से मंगाए पैकेट उपलब्ध थे।
बोतल बंद पानी भी।
बस! बड़े भोज के कारण व्यवस्था में कुछ बदलाव हुए।
बीते सालों में जहां भोजन के लिए प्रतिभागियों को आग्रह पूर्वक आमंत्रित किया जाता रहा, इस साल प्रतिभागियों को समिट के जिम्मेदार कार्यकर्ताओं से कुपन मांग कर भोजन प्राप्त करना था।
अपनों के लिए अपनों द्वारा की गई व्यवस्था थी, इसलिए किसी ने बुरा नहीं माना।
वैसे अन्य बड़े आयोजनों की तरह कुपन वितरण की सम्मानजनक व्यवस्था हो सकती थी।
पहले समिट में ऐसा हुआ भी था। 
समिट की कुख्याति बन चुका विवाद एक बार फिर समिट को मीडिया की सुर्खियों तक ले गया। इसके केवल चेहरे बदले थे अन्दाज व कार्यशैली समान थी। 
जिस कलाकार की कृति पर विवाद उपजाया गया वो समापन तक मुख्यमंत्री के आने की प्रतीक्षा में भावविभोर दिखा। संभवत समिट के तीसरे एडीशन में विवाद बाद मुख्यमंत्री का आगमन उसकी आशाओं की प्रेरणा रही हो।
समिट के फीकेपन का मुख्य कारण शहर में कला विद्यार्थियों को साथ लेकर आयोजित किया गया वो कला आयोजन भी था जो समिट की तयशुदा तारीखों पर ही रचा गया। 
युवाओं का रुझान तो उस समकक्ष आयोजन की तरफ होना ही था... लगभग एक सौ युवाओं को आयोजकों के खर्च पर ना केवल रचनाकर्म करने का अवसर मिला वरन् पहली बार जयपुर में आयोजित  आक्शन में उनकी कृतियां शामिल हुईं। जिन्हें पर्याप्त मूल्य भी मिला। 
....युवाओं की छोडि़ए समिट टीम के सदस्य भी प्रमुख सलाहकारों के रूप में उस समानान्तर आयोजन में शामिल हुए। 
कुल मिलाकर कार सेवकों ने अपनी क्षमता के अनुरूप समिट की पर्याप्त सेवा की। 
इसका असर समिट पर नजर भी आया।
यही परिदृश्य रहा तो संभव है कम्पनी का आगामी जयपुर आर्ट समिट जयपुर के बाहर हो।
साल दर साल आर्ट समिट में विदेश से आने वाले कलाकारों की संख्या में खासा इजाफा हो रहा है।
समिट की बढ़ती लोकप्रियता वैश्विक कला मंच पर इसके बढ़ते प्रभाव की एक बानगी है।
समानान्तर आयोजन का मकसद जो भी रहा हो, लेकिन समिट में नहीं आ सके नवोदित चितेरों से वैश्विक होती कला से रूबरू होने का एक अवसर छिन गया.... जबकि इसी आयोजन में शामिल अनुभवी व स्थापित कलाकार दोनों जगह नजर आते रहे।
कुछ कलाकार भले ही अब समिट के आयोजन में पहले से सक्रीय नजर नहीं आते, लेकिन उनमें से कुछ की उपस्थिति नजर आती रही। यही वह विशालता है, जिसका अनुभव करते हुए मन उनका अभिनंदन करता है और तन स्वत: उनके सम्मान में खड़ा हो जाता है।
यह सवाल अलहदा है कि ऐसे कलाकार हैं ही कितने?
कला के विविध आयामों और मानकों को पूरा कर रहे जयपुर आर्ट समिट में इस बार जयपुर के लोक नाट्य तमाशा को भी शामिल किया गया जो इस बात की गवाही देता है की समिट इस कलाकार बिरादरी को भी मंच देने की कोशिश कर रहा है।
कुल मिलाकर सामान्य कला मेला बनकर रह गए असाधारण समिट की विशाल परिकल्पना के बड़े कैनवास को सम्पूर्ण सफलता के रंग से रंगा जा सकता था।
सालभर योजनाबद्ध काम करने के बाद भी ऐन आयोजन के वक्त होच-पोच वाली स्थिति यही इंगित करती है कि आयोजकों की तैयारी आयोजन की विशाल रचना के अनुरूप पर्याप्त नहीं थी। 
थी भी तो जिनके लिए रचना रची गई हो यदि वो ही नहीं तो रचना का क्या महत्व और क्या औचित्य?
कला पर विवाद: सीन-दर-सीन

जयपुर आर्ट समिट में इस साल फिर हुए बवाल के बाद ऐसी कुछ चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं जिनके बारे में कला जगत से जुड़े संजीदा लोगों को जरूर जानना चाहिए। 
जयपुर आर्ट समिट का लगातार तीसरा वर्ष है जब कला पर बवाल हुआ है। आखिर क्यों होता है बवाल? 
अनुभवी कला प्रेमी अब समझने लगे हैं, होता नहीं... प्रायोजित किया जाता है।
पिछले दो साल की गणित का फलादेश मूमल ने पाठकों के समक्ष उजागर किया था, लेकिन इस वर्ष कुछ पाठकों ने ही मूमल को सारी गणित बताई और घटनाक्रम पर ध्यान देने को कहा।
अब हम आपके समक्ष संजीदा पाठकों द्वारा बताए उन दृश्यों को सिलसिलेवार पेश कर रहे हैं...बस।
# इस बार कला प्रमियों को आर्ट समिट में किसी विवाद की आशंका नहीं होती, क्यों कि युवा कलाकारों का वह गुट विशेष इस वर्ष आर्ट समिट में नजर नहीं आ रहा जिन्हें ऐसे विवाद प्लांट करने का जिम्मेेदार माना जाता रहा है। 
सुबह जयपुर के स्थानीय सिटी भास्कर में एक कलाकृति को चिन्हित करते हुए उसमें अश्लीलता  की तलाश करते हुए पिछले दो सालों में हुए विवादों को सचित्र याद कराया जाता है।
इस खबर को देखते हुए एक न्यूज चैनल के वरिष्ठ कार्यक्रम संयोजक एक टॉक शो प्लान करते हैं। इस शो में कथित अश्लीलता का विरोध करने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जिस महिला को चुना जाता है। उनको जानने-पहचानने वालों की संख्या किसी आम व्यक्ति को जानने वालों से अधिक नहीं होती। लगभग यही स्थिति उस महिला संगठन की होती है जिसका वह बार-बार उल्लेख करती हैं। कला जगत का पक्ष रखने के लिए काफी प्रयासों के बाद चैनल को कलाकार मीनाक्षी भारती कासलीवाल उपलब्ध होती हैं। मध्यान्न 12 बजे इस टॅाक शो का प्रसारण होता है। जाहिर है जयपुर आर्ट समिट व इसमें प्रदर्शित कलाकृतियां इसका प्रमुख विषय होता है।
इस दौरान सुबह 12 बजे से ही रवीन्द्र मंच पर स्थानीय मीडिया का जमावड़ा होने लगता है। संवाददाता व कैमरामैन इधर-उधर धूप सेकते हुए टाइम पास कर रहे होते हैं।
# न्यूज चैनल पर टॉक शो की समाप्ति के बाद अश्लीलता का विरोध कर रही महिला सामाजिक कार्यकर्ता रवीन्द्र मंच पर नजर आती हैं। सामाजिक कार्यकर्ता के साथ दो अन्य महिलाएं और होती हैं। ये सब एक लाल कार में होती हैं जिस पर बड़े-बड़े शब्दों में ‘प्रैस’ लिखा है। इनकी अगवानी के लिए लम्बे बालों व दाढ़ी वाले बड़ा लाल टीका लगाए एक और हिन्दु संगठन के कर्ताधर्ता वहां पहले से उपस्थित होते हैं।
# चैनल के टॉक शो में जिस कृति को केन्द्र में रखकर चर्चा की गई थी इसे आयोजकों ने सुबह स्थानीय अखबार देखकर ही हटा लिया था। ऐसे में कथित अश्लीलता विरोधी सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए वहां कुछ नहीं था।
# दाढ़ी वाले से चर्चा के बाद तीनों महिलाएं सीधे बेसमेंट की ओर बढ़ जाती हैं। दाढ़ी वाला वहां पहले से पहले से जमें मीडिया कर्मियों को महिलाओं की ओर जाने का संकेत करता है। बेसमेंट में एक खास कलाकृति के पास भी मीडिया के कुछ कैमरे पहले से तैनात हैं। इनमें उस चैनल का कैमरा प्रमुखता से शामिल है जिस चैनल पर कुछ देर पहले तक इसी महिला सामाजिक कार्यकर्ता के साथ टॉक शो आयोजित किया गया था।
# विरोधी महिला सीधे एक चुनिंदा कलाकृति के पास पहुंचती है और उसे उतार कर ले जाने लगती है। संबंधित कलाकार विरोध करता है। कुछ अन्य कलाकार भी उसके पक्ष में आते हैं। अब दाढ़ी वाला सामने आता है और अपशब्द बोलते हुए कलाकारों पर महिलाओं से धक्का-मुक्की करने का आरोप लगाते हुए उन्हें घमकाता है।
# बवाल से रवीन्द्र मंच के अधिकारी व कर्मचारी चिंता में पड़ जाते हैं। आर्ट समिट के लिए सक्रीय एक कलाकार रवीन्द्रमंच के चिंतित कर्मचारी को यह कह कहते हुए चिंता नहीं करने को कहता है कि परेशान न हों कुछ देर की बात है, फिर सब ठीक हो जाएगा।
# अश्लीलता का विरोध कर रही महिलाएं कलाकृति को बाहर खुले में ले आती हैं। मीडिया कैमरों के लिए उसका प्रदर्शन करते हुए आर्ट समिट में इसके प्रदर्शन का विरोध करती हैं। भीड़ में लोग जानना चाहते हैं कि महिला कौन हैं? इसके बाद महिला के साथी महिला का विजिटिंग बांटने लगते हैं। इसी बीच दाड़ी वाला भी अपना विजिटिंग कार्ड बांटता नजर आता है।
# समिट के प्रतिभागी कलाकार आयोजकों के सामने सवाल उठाते हैं कि आखिर उनकी कलाकृतियों की सुरक्षा की क्या व्यवस्था है? आयोजक सुरक्षा के लिए रवीन्द्र मंच को जिम्मेदार बता कर अपना पल्ला झाडऩे का प्रयास करते हैं। रवीन्द्र मंच व्यवस्थापक तत्काल यह स्पष्ट करते हैं कि उनकी ओर से केवल स्थान उपलब्ध कराया गया है। शेष सारी जिम्मेदारी आयोजकों की है।
इस बीच विरोध प्रदर्शित कर रही महिलाएं उस पेंटिंग को अपने साथ ले रवाना जाती हैं। आयोजक उन्हें रोकने का कोई प्रभावी प्रयास नहीं करते।
किसी की सूचना पर रवीन्द्र मंच पर पुलिस पहुंचती है। वह आयोजकों से माजरा समझ रही होती है, इसी बीच पुलिस को सूचना मिलती है कि विरोध कर रही महिलाएं उस पेंटिंग को लेकर पुलिस थाने पहुंच गई हैं। पुलिस आयोजकों को साथ लेकर उल्टे पैरों थाने लौट जाती है।
थाने में विराधी महिलाओं और आयोजकों के बीच अश्लीलता और अभिव्यक्ति की आजादी पर लम्बी बहस होती है। इससे उकताए हुए पुलिस अधिकारी एक ओर आयोजकों को विवाद ग्रस्त पेंटिंग का प्रदर्शन नहीं करने की सलाह देते हैं तो दूसरी ओर विरोध कर रहीं महिलाओं को पेंटिंग उठा लाने और कानून को अपने हाथ में लेने के लिए फटकार लगाते हैं।
अगले दिन आशा के अनुरूप आर्ट समिट का विवाद, विवाद खड़ा करने वाली महिला, विवाद से जुड़ी पेंटिंग और संबंधित कलाकार सुर्खियों में थे। आयोजक और कलाकार इस प्रचार से पुलकित थे और घटना पर खेद व्यक्त करने के लिए मुख्यमंत्री वसंधरा राजे के आने की बाट जोहने लगे थे। 
स्थिति सामान्य होने पर पुलिस अपनी कार्रवाई शुरू करती है और घटनाक्रम की कड़ी से कड़ी से जोड़ते हुए कुछ ही देर में दाढ़ी वाले सामाजिक कार्यकर्ता तक पहुंच जाती है। उसे शांति भंग करने के आरोप में गिरफ्तार किया जाता है, लेकिन इसे मीडिया से जगजाहिर नहीं किया जाता। क्योंकि पुलिस अब तक इस सारे ड्रामें के पीछे छुपे प्रचार पाने की मंशा को भांप चुकी थी।
अपने निर्देशक की गिरफ्तारी के बाद विरोधी महिलाएं अगले दिन फिर रवीन्द्र मंच पर नजर आती हैं। इस बार वे काली पट्टी बांध कर नारे लगाने की योजना बनाते हुए मीडिया के इंतजार में होती हैं, लेकिन मीडिया के पहुंचने से पूर्व ही पुलिस उन्हें वहां से हटा देती हैं।
कोर्ट में पेश किए जाने के बाद आरोपी की जमानत पर रिहा होता है, लेकिन अगले ही पल पुलिस उसे कुछ अन्य धाराओं में पुन: गिरफ्तार कर लेती है। अब पुलिस इसे किसी बड़े पूर्व नियोजित षडय़ंत्र का हिस्सा मानकर मामले की जांच कर रही है। एक-एक कर कई नाम और पक्ष बेपर्दा हो रहे हैं। उल्लेखनीय है इनमेें आयोजन से जुड़े कुछ अति सक्रिय कालाकार व कार्यकर्ताओं के नाम भी शामिल हैं। पुलिस मामले की तह तक पहुंच कर मास्टर माइंड को समझना चाहती है।
इससे पूर्व दो वर्ष के विवादों में विवादित कृतियों का प्रदर्शन करने वाला गुट और इन कृतियों का विरोध करने वाला सामाजिक संगठन दोनों वर्षों में एक ही थे। इस वर्ष जहां एक खास कलाकार की कृति को चुना गया, वहीं इसका विरोध करने वाला संगठन भी बिलकुल नया था।

समारोह के दौरान रह-रह कर मुख्यमंत्री के अचानक आने की हवाई सुर्रियां छोड़ी जाती रही, लेकिन एक बार इलाके के पुलिस कप्तान के अलावा कोई नहीं आया। मुख्यमंत्री आगमन को लेकर कलाकार की आस तो समिट के समापन तक कायम थी, उसका मानना था कि पिछली बार ऐसा ही हुआ, तब भी तो सीएम आई थी तो इस बार क्यों नहीं? आयोजक उसे अंत तक धैर्य रखने को समझा रहे थे।

सारांश: इन सब दृश्यों के परिदृश्य में क्या नीहित था? ‘मूमल’ ने विवाद से जुड़े द़श्यों को सीन दर सीन आपके सामने बिना किसी लाग-लपेट के ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया। अब सुधि पाठक और कला प्रेमी स्वयं ही सब समझ जाएंगे कि इस पूरे प्रयोजित कार्यक्रम में किसकी क्या और कितनी भूमिका संभव है?

जयपुर आर्ट समिट: दूसरे दिन का कला कारवां
 मूमल नेटवर्क, जयपुर। जयपुर आर्ट समिट का दूसरा दिन अपने तयशुदा काय्रक्रमों के अनुसार रफ्तार पकड़ ही रहा था कि दोपहर होते-होते अवांछित विवाद के फेर में पड़ गया। यहां हम इस विवाद का समाचार के रूप में जिक्र नहीं करेंगे क्योंकि इस प्रायोजित विवाद को  अभी  तूल देना दुर्भाग्यपूर्ण होगा। (विवाद की तथ्यात्मक समीक्षा अगले अंक में )
आज सिंगापुर की कुमुद क्रोविदी व शिवाली माशुर की पुस्तक 'इण्डियन फोक आर्ट पेंटिंग्स-एन इंटरोडेक्शन'  का विमोचन किया गया। आर्ट टॉक व डिस्कशन के पहले सत्र में कोलकत्ता के देबासीस भट्टाचार्य व अरिंदम दास ने 'यूज ऑफ वीजुअल लैंग्वेज इन एक्सप्रेशन' पर चर्चा की। दूसरे सत्र में मुंबई के अशोक मिश्रा एवं दुर्ग के तुषार वाघले ने 'चैलेंजेस एण्ड अप्रोचुनिटीज इन आर्ट फिल्म मेकिंग' पर अपने विचार व्यक्त किए। आर्ट मूवीज में आज रंजीत रे की डाक्यूमेंटरी फिल्म 'क्ले इमेज मेकर्स ऑफ कुमरातुली' तथा  तुषार वाघले की शार्ट फिल्म 'शेडो ऑफ थॉटस' की स्क्रीनिंग की गई। क्रिएटिव वर्कशॉप में नई दिल्ली की कलाश्री संस्था द्वारा वूमेन एम्पॉवरमेंट पर महिला कलाकारों की वर्कशॉप का समिट के बैनर तले आयोजन किया गया। पारम्पिक कलाओं के डेमोस्ट्रेशन में आज भील आर्ट, गोंड ट्राईबल आर्ट एवं छाऊ मास्क मेकिंग का भी प्रदर्शन किया गया।
आर्ट परफोमेंस में आज दो प्रस्तुतियां हुई। नई दिल्ली की कविता ठाकुर का कथक नृत्य तथा ढाका बांग्लादेश के अशीम हाल्दार सागोर व साथियों की भावपूर्ण प्रस्तुति। हाल्दार की प्रस्तुति ने अपस्थित जनों पर गहरी छाप ही नहीं छोड़ी बहुत कुछ सोचने पर भी मजबूर कर दिया। नेगेटिव विचारों व समाचारों की अवहेलना कर अपने भविष्य को पॉजिटिव सुरक्षित जीवन देने की अपील करता यह परफोमेंस दिल छूने वाला था। कलाकार व साथी इसमें अखबारों को समाज का हर देश का प्रतिनिधि मान उनमें छपने वाली नेगेटिव खबरों से बरी होने की बात कहते हैं। परफोमेंस में वो बताते हैं कि सबका खून एक ही है विचार भले ही अलग-अलग क्यों ना हो। इसमें वो नेगेटिव विचारों का प्रतीक मान कागजों की होली जलाते हैं। लाल गुलाल उड़ा कर बताते हैं कि सबका खून एक जैसा है फिर कैसा भेद। मुख्य कलाकार अपने चेहरे पर सपुेद रंग पोतकर शांति व निश्पत्राता की अगुवाई करते हुए आग के बीच घिरे तीन पोधे को जो भविष्य का प्रतीक हैं उठाकर अपने चेहरे पर लपेट कर उन्हें सुरक्षाकवच देता है।


जयपुर आर्ट समिट: पहले दिन का कला कारवां
मूमल नेटवर्क, जयपुर। जयपुर आर्ट समिट के पहले दिन उद्घाटन सत्र के सम्पन्न होते-होते आर्ट वर्कशॉप की शुरुआत हो गई। कलाकारों की कूचि से निकले रंग कैनवास पर कृतियों को जीवन्त करने लगे। कई सामाजिक संदेशों को स्वयं में समेटे रंग-बिरंगे इंस्टालेशन कलाप्रेमियों को अपने पास कुछ देर ठहरने के लिए मजबूर कर रहे थे। रवीन्द्र मंच के बेसमेंट में बनी सातों गैलेरियां व प्रथम तल की गैलेरी कलाकृतियों से सज गईं। लिम्का बुक में स्थान पाने वाली कृतियों ने भी लोगों का मन मोहा।
पहले दिन की मुख्य गतिविधियां-
आर्ट टॉक व डिस्कशन: इसके पहले सत्र में मुबई की अनुजा स्वामी के साथ जयपुर के गौरव भटनागर ने 'डिजिटल आर्ट, पेपर जू पिक्सल' पर व्याख्यान दिया। दूसरे सत्र में 'छ मेकर्सपर्सपेक्टिव-आर्टस, क्राफ्ट्स एण्ड डिजाईन' विषय पर जयपुर के आयुष कासलीवाल के साथ मुंबई के स्वरूप विश्वास ने अपने मत को शब्दों द्वारा व्यक्त किया और लोगों के पूछे गए प्रश्रों का सटीक जवाब देते हुए उनकी जिज्ञासा शांत की। यह सत्र काफी रुचिकर रहा। जयपुर के मूर्तिशिल्पी हिम्मत शाह जो इस सत्र का हिस्सा थे, उपस्थित नहीं हो सके।
बुक रिलीज: नई दिल्ली के दिनेश कुमार की पहली पुस्तक 'द स्ट्रीम-पोयट्री विद पेंटिंग' का विमोचन हुआ।
आर्ट मूवी: समिट के पहले दिन लोगों ने दो आर्ट मूवीज का आनन्द लिया। पहली शार्ट फिल्म यूक्रेन के थॉमस स्चूमचर की 'अ पेंटर इन द वुड' तथा दूसरी भारत के सुकांकन रॉय की एनीमेशन फिल्म 'साउण्ड ऑफ जॉय' थी।
क्रिएटिव वर्कशॉप: पहला दिन सिंगापुर के आर्ट बाय स्ट्रोक आर्ट स्टूडियो के नाम रहा। इन्होने इण्डियन फोक आर्ट पर अपनी क्रिएटिविटी दिखाई।
आर्ट एण्ड म्यूजिकल परर्फोमेंस: उद्घाटन सत्र में मुंबई के इमरान खान का सितार वादन व शाम ढलने के साथ नई दिल्ली के चिन्मय त्रिपाठी के गायन ने समां बांधा। इसके साथ ही बैंगलूर के जीतिन रेंघर ने अपनी कलात्मक प्रस्तुति से लोगों का दिल जीता।
डेमोस्ट्रेशन ऑफ ट्रेडीशनल आर्ट फार्मस: भारत के कई अंचलो से जुड़ी लोक कलाओं के साथ कुछ विदेशी देशों की पारम्परिक कलाओं का डेमोस्ट्रेशन अनूठा अनुभव रहा। इनमें चाइनीज वुडब्लॉक, खातमकारी, रगस वीविंग, मधुबनी पेंटिंग, सेंड पेंटिंग, सिरेमिक, मीनाकारी, वॉटर कलर पेंटिंग, मिनिएचर, फिगरेटिव, थंगका पेंटिंग, पिछवाई की कलाकारों ने जीवन्त प्रस्तुति दी। इसके साथ सेंड कास्टिंग, मोलेला टेराकोटा व जोगी आर्ट भी दर्शाए गए। यह सभी कलाएं समिट के शेष चारों दिन भी प्रस्तुत की जाएंगी।

जयपुर आर्ट समिट में मूमल पोर्टल का लोकार्पण
मूमल नेटवर्क, जयपुर। कला पत्रकारिता के लिए ख्यात मूमल के वेब पोर्टल का आज समिट के आर्ट टॉक व डिस्कशन सेशन के दौरान कलाकारों व कलाप्रेमियों की उपस्थिति में लोकार्पण किया गया। मूमल के वेब पोर्टल को समिट के फाउण्डर एस.के. भट्ट ने लांच किया। कलाकारों ने मूमल के इस कदम का स्वागत करते हुए पोर्टल को कला जगत के लिए आवश्यक व उपयोगी बताया।

इस अवसर पर मूमल की संस्थापक गायत्री ने मूमल को शीर्ष पर पहुंचाने के लिए संपादक राहुल सेन, आर्टिस्ट डॉ. अनुपम भटनागर, अपनी टीम व समस्त कलाकारों को धन्यवाद दिया। उन्होने कहा कि एस.के. भट्ट द्वारा मूमल के लिए बोले गए शब्द, 'मूमल कला जगत का गूगल है।'  ही इस वेब पोर्टल के बनने और कला जगत के सामने आने का आधार बना। मूमल की कला यात्रा व पोर्टल की जानकारी देते हुए उन्होने कहा कि, 11 वर्ष पहले आरम्भ हुए मात्र चार पन्नों के ब्लैक एण्ड व्हाइट इस प्रकाशन ने कला के प्रति अपनी प्रतिबद्धता निभाते हुए 16 पेज के रंगीन अखबार तक का सफर तय किया और आज ऑन लाईन वेब पोर्टल के रूप में कला जगत को समपिँत है। उन्होने कहा कि मूमल पूरी टीम का कला के प्रति जुनून रहा कभी व्यवसाय नहीं बना और ना ही कभी बनेगा।

क्या है खास पोर्टल में
इस पोर्टल में देश-विदेश की कला गतिविधियों, जानकारियों व खबरों के साथ विद्यार्थियों के लिए कला प्रश्रोत्तरी, अपकमिंग इवेंट, कला जगत की जानी-मानी हस्त्यिों द्वारा गेस्ट राईटर के रूप में लिखे गए महत्वपूर्ण लेख, मूमल विशेष की गंभीर व बेबाक लेखनी,  देश-विदेश के कला बाजार की महत्वपूर्ण खबरें उपलब्ध हैं। इनके साथ ही महत्वपूर्ण कला संस्थाओं व अकादमियों के लिंक भी दिए गए हैं। भविष्य में यह लिंक बढ़ते जाएंगे।
इसी  के साथ मूमल के इस पोर्टल में ऑन लाईन आर्ट गैलेरी भी है। मूमल वेब पोर्टल की एडरेस है www.moomalartnews.com
 (Photo: Dr. Lalit Bhartiya)

गरिमापूर्ण सादगी से आरम्भ हुआ जयपुर आर्ट समिट का चौथा एडीशन
मूमल नेटवर्क, जयपुर। जयपुर आर्ट समिट का चौथा एडीशन शहर की सांस्कृतिक धड़कन रवीन्द्र मंच पर आज शुरु हो चुका है। सुबह 11 बजे आमन्त्रित कलाकारों के साथ बहुत ही सादगी और गरिमामय अन्दाज में समिट का उद्घाटन हुआ। उद्घाटन अवसर पर समिट के फाउण्डर एस.के. भट्ट के साथ गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में मंचासीन नामचीन कलाकार लक्ष्मा गौड़ , अंजनी रेड्डी, स ंयुक्त अरब अमीरात स्थित एटेलियर हबीब के संस्थापक व पार्टनर आकिफ हबीब व समिट के डायरेक्टर महावीर प्रताप शर्मा ने उपस्थित जनों को सम्बोधित किया।
अपने स्वागत भाषण में बोलते हुए समिट फाउण्डर एस.के. भट्ट ने कहा कि, कला की पूरी दुनिया में सिर्फ  एक ही भाषा है और वह स्वयं 'कला' ही  है।  लक्ष्मा गौड़ ने कहा कि आर्ट को सही दिशा में केन्द्रित होना चाहिए। जयपुर आर्ट समिट जैसे आयोजन दूसरे शहरों के लिए प्रेरणा स्त्रोत है। उन्होंने इस तरह की गतिविधियों में कला विद्याार्थियों की अधिक से अधिक भागीदारी की आवश्यक्ता पर बल दिया।
आर्टिस्ट अंजनी रेड्डी ने अपने सम्बोधन में कहा कि विभिन्न आर्ट एक्टिविटीज, क्रिएटिव वर्कशॉप्स, पारम्परिक कला स्वरूपों के डेमोस्ट्रेशन, इंस्टालेशन व आर्ट फिल्मों के प्रदर्शन के साथ जयपुर आर्ट समिट मेगा इवेंट बन गया है। आकिफ हबीब ने आयोजन के प्रति खुशी जाहिर करते हुए कहा कि 25 देशों के कलाकारों के साथ 29 देशों के कलात्मक कार्यों को एक ही छत के नीचे देखना खुशी की बात है। इस अवसर पर डायरेक्टर महावीर प्रताप शर्मा ने समिट की कला यात्रा व उपलब्धियों का वर्णन किया।
कला प्रदर्शनियों व आर्ट कैम्प का उद्घाटन जयपुर राजघराने की राजकुमारी व सवाईमाधोपुर की विधायक दीया कुमारी ने किया। इस अवसर पर समिट के कैटलॉग का विमोचन भी किया गया। उद्घाटन समारोह में रंग भरने के लिए दिल्ली के कलाकार इमरान खान व साथियों ने संगीतमय प्रस्तुित दी।
जयपुर आर्ट समिट की बदलती तस्वीर
कला संसार के केनवास पर तेजी से उभरते इस आयोजन की बदलती तस्वीर ने कला जगत की कई पुरानी धारणाएं और मिथक तोड़े हैं। नए-नए प्रतिमान स्थापित हो रहे हैं। इन्हें जानने के लिए आपको बरस दर बरस इसमें हुए बदलावों का करीबी जायजा जरूर लेना चाहिए।
एडीशन-1  (2013 )
जयपुर आर्ट समिट की शुरुआत उस सपने का परिणाम थी जिसमें राजस्थान की राजधानी जयपुर को एक बहुत बड़े कला प्लेटफार्म के रूप में देखा गया था। सपना सच होने लगा... जब समिट का पहला एडीशन 2013 में जयपुर ही नहीं वरन् देश-दुनिया के आगे अपनी पूरी प्रतिबद्धता से सामने आया और सफल हुआ। समिट के पहले एडीशन की सफलता के पीछे जहां कला के लिए सर्वस्य समर्पण की भावना छुपी थी वहीं आगे और अधिक अच्छा....और अधिक बड़ा करने का जुनून भी।
समिट का पहला एडीशन जयपुर के प्रोग्रेसिव आर्ट ग्रुप, जवाहर कला केन्द्र, राजस्थान फोरम तथा होटल क्लार्क आमेर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। समिट के चेहरे कोई भी रहे हों, किन्तु आत्मा रही कॉपरेट जगत के शैलेन्द्र भट्ट,  जिन्होने कला के प्रति अपने जुनून के चलते इस आयोजन को सफल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी और अपना सब कुछ दाव पर लगा दिया।
7 से 11 नवंबर तक आयोजित पहले एडीशन का आयोजन दो जगहों पर सम्पन्न हुआ, होटल आमेर क्लार्क व जवाहर कला केन्द्र। समिट की चेयरपर्सन थीं टिम्मी कुमार व कन्वीनर मृदुल भसीन। कलाकारों व आमन्त्रित खास मेहमानों को सम्मानित करने के लिए दिए जाने वाले मोमेन्टो के रूप में चीनी मिट्टी के मग बनवाए गए जिन पर जाने-माने कलाकारों की कृतियां अंकित थीं। प्रदर्शनी के साथ गैलेरीज शो, कला चर्चाएं, सेमीनार, लाइव डेमोस्ट्रेशन, आर्ट वर्कशॉप, इंस्टॉलेशन व कई महत्वपूर्ण कला रूपों का प्रदर्शन इस एडीशन की खासियत रही। समिट का उद्घाटन तत्कालीन राज्यपाल मार्गेट अल्वा ने किया। समिट में देश-विदेश के कलाकारों ने शिरकत की। तमाम राजनीति और गुटबाजी के बावजूद आयोजन को सराहना मिली।

एडीशन-2 (2014)
पहले आयोजन में सामने आई राजनीति और गुट बाजी के बाद समिट का दूसरा एडीशन 2014 में 14 से 18 नवंबर के बीच कई अन्दरूनी व बाहरी बदलाव के साथ कला जगत के सामने आया। उद्घाटन होटल आमेर क्लार्क में हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पद्मश्री डॉ. सरयु दोषी उपस्थित थीं। विशिष्ट अतिथि के रूप में कला संस्कृति विभाग प्रमुख सचिव शैलेन्द्र अग्रवाल और जवाहर कला केन्द्र के तत्कालीन महानिदेशक उमरावमल सालोदिया। चैयरपर्सन टिम्मी कुमार व कन्वीनर मृदुल भसीन आगंतुकों मेहमानों का स्वागत करती नजर आईं। उद्घाटन अवसर को संगीतमय किया प्रसिद्ध वायलिन वादिका अनुप्रिया देवताले ने।
समिट के दूसरे एडीशन तक आते-आते इसमें कॉरपोरेट जगत की भागीदारी बढ़ चुकी थी। जयपुर आर्ट समिट का प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी के रूप में रजिस्ट्रेशन हो चुका था। कॉरपोरेट जगत के दिनेश कुकरेजा, महावीर प्रताप शर्मा, नीरज रावत बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के रूप में सामने थे। साथ ही जयपुर आर्ट समिट फाउण्डेशन भी अस्तित्व में आ गया था। अब कला जगत के लिए एक कम्पनी भी थी और एक एनजीओ भी। आर्ट समिट का अस्थाई कार्यालय होटल आमेर क्लार्क की चारदीवारी से बाहर निकल मालवीय नगर स्थित एक आर्ट कैफै में पहुंच गया था। समिट की व्यवस्थित कार्य प्रणाली ने राजस्थान, खासतौर पर जयपुर में इस मिथक को पहली बार खण्डित किया कि कला क्षेत्र के ऐसे आयोजन करने को कोई कलाकार या कलाकारों का समूह ही सक्षम होता है।
समिट के इस एडीशन में कला की ग्यारह विधाओं को 35 कलाकारों ने प्रस्तुत किया जिनमें चार अन्य देशों के कलाकार शामिल थे। इन विधाओं में प्रमुख रूप से वीडियो आर्ट शामिल हुआ। पहले एडीशन की तरहा ही आयोजन स्थन होटल आमेर क्लार्क व जवाहर कला केन्द्र रहे।
इस एडीशन की एक नई बात रही विवाद। उदयपुर के मूर्तिकार भूपेश कावडिय़ा का इंस्टालेशन, जिसमें टायलेट पॉट पर कुछ धार्मिक चिन्हों को दर्शाया गया था। एक सामाजिक संगठन ने विरोध किया, तोड़-फोड़ हुई और समिट को कलाकार की ओर से माफी मांगनी पड़ी। मामला मीडिया में चर्चित रहा, संबंधित कलाकारों व समिट को अतिरिक्त कवरेज मिला।
एडीशन-3 (2015)
समिट के तीसरे एडीशन में पहले व दूसरे वर्ष के कई सहयोगी विलग हुए तो कई सहयोगियों के पद व अधिकार सिमट गए, लेकिन समिट का दायरा और बढ़ा। इस एडीशन के साथ ही समिट के अपने ऑफिस  में समिट का काम-काज आरम्भ हुआ। तीसरे एडीशन का आयोजन 21 से 25 नवंबर 2015 को हुआ। आयोजन स्थल केवल एक ही रखा गया, जवाहर कला केन्द्र का शिल्प ग्राम। तीसरे एडीशन में 12 देशों के कलाकार शामिल हुए।
इस वर्ष उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि थे कला संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव शैलेन्द्र अग्रवाल और गेस्ट ऑफ ऑनर थे कलाकार ललिता लाजमी, गोगी सरोजपाल व आकिफ हबीब। इस वर्ष समिट में तीन विदेशी गैलेरीज भी अपने संग्रह के साथ प्रस्तुत हुईं। कला की नई विधा के रूप में साइट स्पेसफिक आर्ट अपनी छोटी सी बानगी के साथ शामिल हुआ। बच्चों के लिए विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें स्कूली बच्चे खुलकर रंगों के साथ खेले। कॉलेज के विद्यार्थी स्ट्रीट आर्ट की प्रस्तुति के साथ समिट का हिस्सा बने। एक विशेष बात यह रखी गई कि सेमीनार के लिए रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता को समाप्त करते हुए खुले प्रांगण में पेपर पढ़े गए। कलाप्रेमियों ने इसका खुला आनंद भी लिया। परफार्मिंग आर्ट के रूप में बंगाल के ‘बाउल’ लोक संगीत को चुना गया।
पिछले वर्ष के अनुभव के बाद इस वर्ष फिर एक विवाद हुआ। गाय की डमी पर विवाद। इस बार भी विवाद में उन्हीं युवा कलाकारों के गुट की कृति थी। फिर वही सामाजिक संगठन अपने विरोधी तेवरों के साथ सामने आया। भारी हंगामें के बीच पुलिस ने कलाकार व उसके सहयोगियों को गिरफ्तार किया। बाद में छोड़ दिया गया। यह अफवाह भी फैली कि अभिव्यक्ति की आजादी व पुलिस जुल्म के खिलाफ कुछ  कलाकार अपने सरकारी सम्मान लौटाएंगे। इस विवाद की चर्चा से अखबारों के कॉलम अच्छे खासे रंगे गए। यह ख्याति मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को भी समिट के प्रांगण तक ले आई।
बाद में यह चर्चा भी रही कि विवाद संयोग से हुआ या प्रायोजित किया गया? पुलिस, प्रशासन व सरकार स्वयं को ठगा सा महसूस करती रही। जवाहर कला केन्द्र ने अगले आयोजन के लिए समिट को स्थान उपलब्ध नहीं कराने का मन बना लिया। इसके बाद समिट आयोजकों को भी ऐसे डिजायनर कलाकारों और उनके संरक्षकों से किनारा करना पड़ा।
एडीशन-4 (2016)
....और अब समिट का चौथा एडीशन 7 से 11 नवंबर तक जयपुर के रवीन्द्र मंच पर आयोजित हो रहा है। जो समिट के बोर्ड में प्रमुखता से शामिल थे वे भी सलाहकारों की सूचि में सिमट गए हैं। समिट के प्रमुख सहयोगी  व कई बड़े कलाकार के रूप में पहचान पा रहे कई कलाकार इस वर्ष समिट टीम में शामिल नहीं हैं।
जयपुर में एक पुराना मिथक टूट चुका हैं कि एक बड़े ग्रुप विशेष की सहमति व सहयोग के बिना कला की कोई भी गतिविधि यहां असंभव है। वह बड़े कलाकार जो समिट के बोर्ड में प्रमुखता से शामिल थे वे आज सलाहकारों की सूचि में सिमट गए हैं। ग्रुप के प्रमुख समिट से जरूर अलग हो चुके हैं लेकिन उनके संगी-साथी और अनुयायी अभी भी किसी ना किसी रूप में समिट से जुड़े हुए हैं। वो साथ टीम के सदस्य के रूप में हो या फिर अपनी कृति प्रदर्शित करने वाले कलाकार के रूप में।
समिट के रूप में जयपुर या राजस्थान के कला जगत के बरसों पुराने मिथक टूटे हैं तो कई नए आयाम जुड़े भी है। बड़े कलाकार नामों से मोहभंग करते हुए समिट के फाउंडर डायरेक्टर की साहसिक पहल पर बोर्ड ने एक बेहतरीन कदम की शुरुआत की है, नए विचारों के साथ सामने आए युवा कलाकारों को जोडने व समिट जैसे बड़े होते चले जा रहे आयोजन में प्लेटफार्म उपलब्ध करवाने की।
कला विधाओं का दायरा भी बढ़ाया गया है। विशेष बात कि लोक कलाओं के डेमोस्ट्रेशन पर बल दिया गया है। समिट के बढ़ते कद का सबूत और क्या होगा कि उसमें शामिल होने की चाह रखने वाले देश के कुछ हिस्सों के कलाकार झूठी बात प्रचारित कर रहे हैं कि हमारी कृति भी समिट की प्रदर्शनी में शामिल है।

जयपुर आर्ट समिट का नवरंग
मूमल न्यूज, जयपुर। जयपुर आर्ट समिट का चौथा संस्करण रवीन्द्र मंच मंच के साथ आठ अन्य स्थानों पर भी अपने रंग बिखेरेगा। इनमें अजमेर की शुभदा संस्था के स्पेशल बच्चों की वर्कशॉप में समिट के रंग पहले ही खिल चुके हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार रवीन्द्र मंच में होने वाले प्रमुख आयोजन के साथ ही 8 दिसम्बर को टोंक में ‘यूनीसेफ’ के साथ मिल कर बाल कलाकारों के लिए कैेंप होगा। जयपुर के समीप चौमू कस्बे में 9 दिसम्बर को समिट में आमंत्रित कुछ अतिथि कलाकार एक आर्ट कैंप में काम करेंगे। इसी क्रम में 10 दिसम्बर को कानोता में आर्ट कैंप होगा।
इसके अलावा समिट की ओर से जयपुर के चार प्रमुख स्थानों पर ग्राफिटी के तहत मुंबई के दो कलाकार अमोल व अनिल स्ट्रीट आर्ट के रूप में वॉल पेंटिंग्स कर रहे हैं। इनमेें से एक कार्य पूरा भी हो चुका है।



शुभदा संस्थान में 'ट्रयू आर्ट बाय ट्रयू हार्ट' का आयोजन 
मूमल नेटवर्क, अजमेर। मानसिक विमंदित बच्चों के लिए कार्यरत शुभदा संस्थान द्वारा संचालित स्पेशल स्कूल में आज बच्चों की पेंटिंग वर्कशॉप 'ट्रयू आर्ट बाय ट्रयू हार्ट' का आयोजन किया गया। बच्चों ने इस वर्कशॉप का भरपूर इंज्वाय करते हुए रंगों से अठखेलियां की। अपने मन की आकृति और अपने मन के रंग, चित्रांकन के नियमों से हटकर एक अल्हड़ व खुशी भरी अद्भुत रचना करते नन्हें रचनाकार। स्पेशल बच्चों की मासूमियत से भरी कृतियों के रंग बार-बार पिकासो के उस कथन की याद दिला रहे थे कि 'चित्र सिद्धान्त के अनुरूप चित्रांकन करना हमेशा से सरल था लेकिन जब बच्चों की तरह चित्र बनाने की शुरुआत की तो बहुत कठिन साधना साबित हुई।' दुनिया के माने हुए चित्रकार की कठिन साधना इन बच्चों के हाथों से बहुत ही सरलतम रूप से फिसल कर जब कागज पर कोई रंगबिरंगी आकृति का रूप लेती तो लगता मानों कई पिकासो एक साथ आकर कला रचना में जुट गए हैं।
स्पेशल बच्चों की यह आर्ट वर्कशॉप कला जगत में तेजी से उबरते 'जयपुर आर्ट समिट'  की देखरेख में आयोजित की गई थी। वर्कशॉप में तैयार कुछ रचनाएं जयपुर आर्ट समिट के चौथे एडीशन में 7 से 11 दिसम्बर तक जयपुर स्थित रवीन्द्र मंच वर प्रदर्शित की जाएंगी।
जयपुर आर्ट समिट का चौथा एडीशन रवीन्द्र मंच में
7 से 11 दिसम्बर तक गुलजार रहेगा रंग-तरंग संसार
मूमल नेटवर्क, जयपुर। जयपुर आर्ट समिट का चौथा एडीशन कला के विविध रंगों के साथ इस बार जयपुर के रवीन्द्र मंच परिसर पर आयोजित होगा। अपने पुर्ननिर्माण की प्रक्रिया से गुजर रहे रवीन्द्र मंच में इन दिनों समिट की तैयारियां चल रही हैं। हालांकि समिट के आरंभ होने तक रवीन्द्र मंच का मुख्य हॉल तैयार नहीं हो पाएगा, फिर भी शेष तैयार हो चुके हिस्सों में कला के बढ़ते आयामों के साथ प्रस्तुत होने वाला यह आयोजन इस वर्ष 7 से 11 दिसम्बर तक अपने रंग बिखेरने को तैयार है।
कभी जयपुर की सांस्कृतिक धडक़न माने जाने वाले रवीन्द्र मंच में इस वर्ष समिट में जहां 25 देशों के कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे वहीं देश-विदेश की 15 गैलेरीज अपने संग्रह का प्रदर्शन करेंगी। गैलेरीज के साथ समिट की एग्जीबिशन में देश विदेश के 125 आर्टिस्ट्स का काम भी प्रदर्शित किया जाएगा।
यह होंगे समिट के प्रमुख आकर्षण
-इंटरनेशनल आर्टिस्ट कैम्प व इंटरेक्टिव सेशन
-आर्ट एग्जीबिशन व गैलेरीज शो
-कैलीग्राफी
-आर्ट इंस्टॉलेशन (इंडोर व आउटडोर)
-आर्ट टॉक व डिस्कशन
-बुक रिलीज
-आर्ट मूवीज
-क्रिएटिव वर्कशॉप
-आर्ट परर्फोमेंस
-डेमोस्ट्रेशन (इंडोर व आउटडोर)
इन कार्यक्रमों के साथ लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज लारजेस्ट सक्र्यृलर कैनवास पेंटिंग का प्रदर्शन, एक सिंगल कैनवास पर भगवान गणेश की 4500 छवियों के अंकन का प्रदर्शन, फोटोग्राफी कॉन्टेस्ट व एग्जीबिशन, मधुबनी पेंटिंग में रामायण, बॉलीवुड के 104 वर्षों के सफर को समेटे पोस्टर्स का प्रदर्शन किया जाएगा। इस वर्ष देश के माने हुए कार्टूनिस्ट सुधीर तैलंग ने अपनी जीवन यात्रा समाप्त करते हुए दुनिया के साथ कला जगत को अलविदा कहा। इस महान कार्टूनिस्ट को याद करते हुए समिट उन्हें भावभीनी श्रृद्धांजलि अर्पित करेगा। समिट के चौथे एडीशन का समापन समारोह 11 दिसम्बर की शाम 6 बजे होगा।
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20161119

कला मेला 2016 उदयपुर, Udaipur Lake Festival

समीक्षा: उदयपुर में कामयाब कला मेला

वरदान साबित हुआ कला मेला कमेटी का नहीं बनना 
बरसों बाद जयपुर के बाहर हुए राजस्थान ललित कला अकादमी के 19वें कला मेले ने कई पुराने ऐसे मिथक तोड़े जिन्हें स्थाई माना जाता था तो कई नए आयाम भी जोड़े। जयपुर के कलाजगत का एक गुट इस कला मेले से दूर रहा। पहली बार कला मेला कमेटी नहीं बनी और कला मेला कमेटी का नहीं बनना मेले के लिए वरदान साबित हुआ। उदयपुर के वरिष्ठ व युवा कलाकारों ने मिलकर कला मेले की कमान कामयाबी से संभाली। 
स्टाल आबंटन के लिए गठित समिति का कोई सदस्य उदयपुर में नजर नहीं आया। उदयपुर के स्थानीय कलाकारों ने आवंटन पूरी पारदर्शिता के साथ लॉटरी सिस्टम द्वारा किया। याद दिलवा दें कि मार्च 2015 में 18वें कला मेले में उत्पन्न अव्यवस्थाओं और कमेटी द्वारा आवंटन प्रक्रिया से कलाकारों के असंतोष की जानकारी मिलने के बाद मूमल ने अकादमी को लाटरी द्वारा आवंटन करवाए जाने का सुझाव दिया था और इस सुझाव को प्रकाशित भी किया था। 
कला मेले में जिला प्रशासन द्वारा जो टेंट की वयवस्था की गई थी, काफी अच्छी थी। स्टॉल्स के आगे खुली जगह अधिक छोड़ी गई थी जिससे दर्शकों को कृतिया देखने व कलाकारों को प्रदर्शन में सहूलत मिली। कला मेला प्रांगण में प्रवेश के लिए राजीव गांधी उद्यान के ठेकेदार द्वारा वसूले गए शुल्क के बावजूद कला मेले में दर्शकों की संख्या संतोषप्रद रहने के बाद अकादमी के समक्ष आगामी कला मेला व्यवस्था के लिए एक नया विचार जन्म लेने लगा है।
किसी कला मेला समिति का दखल न होने के कारण अकादमी के अधिकारियों और कर्मचारियों को काम करने की पूरी स्वतंत्रता मिली। ऐसे में प्रदर्शनी अधिकारी से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक अकादमी का पूरा अमला कला मेला व्यवस्था में मेला शुरू होने के चार दिन पहले से समापन तक पूरी मेहनत से जुटा रहा। उदयपुर के उन बड़े दिल वाले कलाकारों की भी प्रशंसा करनी होगी जो बिना किसी लाभ, नाम या पद की लालसा के मेले को सफल बनाने में जुटे रहे। यही कारण रहा कि उदयपुर का कला मेला बिना किसी झंझट के सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ।
कुछ मौका परस्त लोग सभी जगह होते हैं, वे यहां भी सक्रीय रहे। उन्होंने कला मेले मेें अन्य लोगों की मेहनत को अपने लिए खूब भुनाया। उद्घाटन के दिन जिला कलक्टर के साथ चिपके रहने से लेकर समापन वाले दिन महापौर के आगे-पीछे बने रह कर यह जताने में जुटे रहे कि यह आयोजन उन्हीं के नेतृत्व का प्रताप है। इसका उन्हें तत्काल लाभ भी मिला, जिला प्रशासन, आगामी दिसम्बर में पर्यटन विभाग की ओर कुम्भलगढ़ में होने वाले नेशनल आर्ट कैंप का कारोबार इन्हीं के हाथ में सौंप सकता है। उल्लेखनीय है यह पर्यटन विभाग इस कैंप के लिए एक मोटी रकम खर्च करने वाला है।
उदयपुर के कलाकारों की स्टाल्स में प्रतिभागिता अधिक होने के कारण पुरस्कार भी उदयपुर के नाम अधिक रहे। कला शिविर में जहां अकादमी द्वारा एक ही कलाकार को पुन:-पुन: बुलाए जाने का रोष रहा वहीं एक कलाकार द्वारा अपनी कृति को कैंप से घर ले जाकर पूरा करने की हैरानी भी। लाइव डेमो देने आए युवा कलाकारों के मानदेय (2 हजार 500 रुपए)व कला शिविर में बुलाए गए कलाकारों के मानदेय (50 हजार रुपए) का भारी अन्तर चर्चा का विषय रहा। कृतियों की बिक्री का आंकड़ा शून्य रहा,  संभवत सरकार का नोटबंदी फैसला व मेले के स्थानीय स्तर पर प्रचार प्रसार में कमी इसके कारण रहे। 
अकादमी व जिला प्रशासन के तालमेल की कमी के चलते जिला प्रशासन द्वारा लेक फेस्टिवल की तारीखों को ही कला मेला तारीखों के रूप में प्रचारित किया गया। प्रेस को कला मेले की जानकारी के अभाव के चलते प्रेस की सुर्खियों से मेला लापता रहा। एक पूरा आयोजन समाचारों में लेक फेस्टिवल की खबरों के बीच कुछ पंक्तियों में सिमट कर रह गया।  जिला प्रशासन ने भी कला मेला व्यवस्थाओं में दिल खोल कर खर्च किया। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात, लम्बे समय से किसी प्रमुख जनप्रतिनिधि के हाथों लोकार्पण के लिए प्रतीक्षारत प्रदर्शनी  वाहन का मेले में गुपचुप लोकार्पित हो जाना रहा।
पूरे परिदृश्य पर नजर डालें तो एक-आध चीजों को छोडक़र मेला सफल रहा। मेले की सफलता राजस्थान के अन्य शहरों में मेला आयोजन की धारणा को बल देगी। उल्लेखनीय है कि कला मेला इतिहास में यह दूसरा अवसर है जब कला मेला जयपुर के बाहर आयोजित किया गया है। इससे पूर्व 1992 में चौथा कला मेला उदयपुर में ही आयोजित किया गया था।
मूर्तिकारों का कम प्रतिनिधित्व
उदयपुर को शिल्प नगरी के नाम से जाना जाता है। राजस्थान में यह पहला शहर है जहां पर मूर्तिकारों के भव्य स्टूडियोज व गैलेरीज हैं। बावजूद इसके कला मेले में मूर्तिकारों का अभाव रहा। कुल जमा दो कलाकारों ने ही मेले में मूर्तिशिल्प का प्रदर्शन किया। उसमें से भी एक कलाकार को पेंटिंग के क्षेत्र में जाना जाता है। मेले से वरिष्ठ मूर्तिकार चौधरी ने भी दूरी बनाए रखी, जो जयपुर के कला मेले में अपनी स्टॉल के साथ नजर आ चुके हैं।
आवंटन कमेटी नदारद
जयपुर में कलाकारों से प्राप्त आवेदनो पर निर्णय लेने के लिए जो कमेटी बनाई गई थी, उसका एक भी सदस्य कला मेले में नजर नहीं आया। अकादमी अधिकारियों का कहना है कि उनका उदयपुर में कोई काम नहीं था अत: हमने उन्हें निमन्त्रण नहीं दिया, हां वो अपने स्तर पर मेले में आ सकते थे।
उल्लेखनीय है कि अन्य वर्षों की तरह इस वर्ष भी कला मेला कमेटी का गठन किया गया था। कला मेला क्योंकि उदयपुर में लेक फेस्टिवल के अवसर पर जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित होना था इसलिए उदयपुर जिला प्रशासन द्वारा यह एतराज उठाया गया कि व्यवस्थाओं की सारी जिम्मेदारी हमारी है तो कला मेला कमेटी का क्या औचित्य है। तब तत्कालीन अकादमी चैयरपर्सन रौली सिंह ने बात को संभालते हुए कला मेला कमेटी को स्टॉल आवंटन कमेटी का नाम दे दिया। कमेटी की जयपुर में एक बार ही मीटिंग हुई और प्राप्त हुए 62 आवेदनों में से 58 पर स्वीकृति की मोहर लगा कर जिम्मेदारी पूरी की गई। उदयपुर में मेला आरम्भ होने पर आवंटन कमेटी की अनुपस्थिति में स्थानीय कलाकारों ने कमान संभाली और पूरी पारदर्शिता के साथ लॉटरी सिस्टम के जरिए कलाकारों को स्टाल का आवंटन तो किया। उसी समय कला मेले में भाग लेने के इच्छुक अन्य कलाकारों की कृतियों पर फैसला करते हुए उन्हें तत्काल स्टॉल आवंटित कर एक मिसाल कायम की। यह भी सिद्ध कर दिया कि कला मेले को सफलता पूर्वक सम्पन्न होने के लिए किसी कमेटी की नहीं अपितु समर्पित सेवाभावी कलाकारों की आवश्यक्ता है।
अकादमी व जिला प्रशासन का तालमेल नहीें
अकादमी व जिला प्रशासन के तालमेल की कमी कला मेले को वहन करनी पड़ी। अकादमी द्वारा छपवाए गए निमन्त्रण पत्र नहीं बांटे गए। जिला प्रशासन को जब अकादमी से आमन्त्रण पत्र प्राप्त नहीं हुए तो उन्होने अपने स्तर पर आमन्त्रण छपवाए लेकिन तब तक कला मेले का उद्घाटन हो चुका था और कई लोगों तक निमन्त्रण पहुंच ही नहीं पाए। उद्घाटन अवसर पर मेहमानों की कमी, कला मेले में पर्याप्त दर्शकों की कमी इस तालमेल के नहीं होने का ही परिणाम थी। तालमेल की कमी का सबसे बड़ा प्रमाण यह था कि कला मेले की अवधि 17 से 21 नवंबर थी जबकि प्रशासन ने होर्डिंग्स में 18 से 20 नवंबर ही प्रिंट करवाया था जो कि लेक फेस्टिवल की अवधि थी।
स्थानीय प्रेस को सूचना की अनुपलब्धता
अकादमी व जिला प्रशासन द्वारा स्थानीय प्रेस को कला मेले के बारे में खास सूचनाएं या प्रेस नोट नहीं पहुंचवाए गए, ना ही कोई प्रेस कान्फ्रेंस ही रखी गई। परिणामस्वरूप कला मेला लेक फेस्टिवल के प्रोग्राम में कहीं खो गया। उद्घाटन पर दैनिक भास्कर में लेक फेस्टिवल की सूचना के साथ कुछ लाईनों का समाचार कला मेले का प्रकाशित हुआ। बाद मेें स्थानीय वरिष्ठ कलाकारों ने अपने संबंधों के चलते राजस्थान पत्रिका के रिर्पोटर को बुलवा कर कला शिविर से सम्बन्धित चर्चा कराई।
अकादमी का अमला जुटा
प्रशंसनीय बात यह रही कि कला मेले का आयोजन सफलता पूर्वक सम्पन्न करने के लिए राजस्थान ललित कला अकादमी का पूरा अमला तीन-चार दिन पहले ही उदयपुर पहुंच गया। प्रदर्शनी अधिकारी  से लेकर फोर्थ क्लास कर्मचारियों ने भी मेला आयोजन के लिए जीतोड़ मेहनत की।
स्थानीय कलाकारों का प्रभावी सहयोग
कला मेला आयोजन कार्यों में उदयपुर के कलाकारों का सहयोग प्रभावी व सराहनीय रहा। स्टॉल आवंटन का महत्ती कार्य, उद्घाटन में सहयोग, मेले में कलाकृतियों से परिचय करवाने के लिए स्कूली बच्चों को लाने की जिम्मेदारी, लाइव डेमो के लिए कलाकारों की व्यवस्था, निमन्त्रण पत्रों की छपवाई और युवा छात्र कला प्रतियोगिता के लिए छात्रों को प्रेरित कर एकत्रित करने के साथ कई महत्वपूर्ण कार्यो में सहयोग की छाप छोड़ी।
कलाकृतियों की बिक्री
कला मेले में इस बार कलाकृतियों की बिक्री का आंकड़ा लगभग शून्य रहा। यदि  कोई एक-आध कृति बिकी भी होगी तो अकादमी तक इसकी सूचना नहीं पहुंच पाई।
‘पेग’ नदारद
जयपुर का प्रोगेसिव आर्टिस्ट ग्रुप इस कला मेले में बिल्कुल नजर नहीं आया। कला मेले के इतिहास में यह पहला अवसर है कि ‘पेग’ ने कला मेले में स्टॉल लेकर प्रतिभागिता नहीं निभाई।
मोहनलाल सुखडिय़ा विश्वविद्यालय का औचक प्रवेश
मोहनलाल सुखडिय़ा विश्वविद्यालय ने कला मेले में प्रतिभागिता के लिए पूर्व में रुचि नहीं लेते हुए स्टॉल आवंटन हेतु आवेदन नहीं किया गया था। विश्वविद्यालय ने उद्घाटन अवसर पर अचानक मेले में भाग लेने का निर्णय लिया और श्रेष्ठ इंस्टालेशन के रूप में कला अकादमी द्वारा दिए गए 10 पुरस्कारों में से एक हासिल किया।
आयोजन भुनाने वाले भी दिखे
कला मेले जैसे राजस्थान के प्रसिद्ध कला आयोजन और मेले में शामिल विशिष्ट लोगों  के सामीप्य को स्वहित में भुनाने वाले कुछ लोग भी वहां नजर आए। कला मेले के उद्धाटन व समापन के अवसर पर आए प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष खुद को प्रस्तुत करते हुए उन्हें देखा गया। जानकारों की माने तो इस मशक्कत का मुख्य कारण आने वाले दिनों में होने वाला कुम्भलगढ महोत्सव व उसके तहत आयोजित किए जाने वाले कला शिविर के संयोजन अधिकार को प्राप्त करना है।
लाइव डेमो में युवा प्रतिनिधित्व
मेले में मोलेला के युवा कलाकार दिनेश चन्द कुम्हार ने टेराकोटा कृतियों के निमार्ण की जानकारी देते हुए लाइव डेमो दिया वहीं उदयपुर के युवा आर्टिस्ट अनुराग मेहता ने अपने लाइव डेमो में वॉटर कलर का प्रयोग करते हुए कृति को जीवन्त कर दिया। दोनों कलाकारों ने तैयार कृतियां अकादमी को सौंप दीं। अकादमी द्वारा दोनो युवा कलाकारों को मानदेय के रूप में 2,500-2,500 रुपए की नकद राशि प्रदान की।
प्रदर्शनी वाहन का लोकार्पण
लंबे समय से प्रतीक्षारत प्रदर्शनी वाहन का लोकापर्ण इस कला मेले के उद्घाटन अवसर पर उदयपुर के जिला कलेक्टर द्वारा किया गया। अकादमी ने वाहन के लोकापर्ण की सूचना प्रेस को नहीं दी। ज्ञात रहे कि इस प्रदर्शनी वाहन का लोकार्पण मार्च 2015 में जयपुर में आयोजित हुए 18वें कला मेले में होना था जो वाहन के सही समय पर तैयार नहीं हो पाने के कारण नहीं हो पाया था। इस वाहन को तैयार करने में लगभग 21 लाख रुपए की राशि खर्च हुई है।
कला शिविर में फेर-बदल
कला शिविर के लिए पूर्व में घोषित 10 कलाकारों की सूचि में तत्कालीन अकादमी चैयरपर्सन रौली सिंह ने ग्यारहवें कलाकार के रूप में राम जैसवाल का नाम जोड़ा। इन ग्यारह कलाकारों में से दो कलाकार वी. नागदास तथा किशोर शिंदे शिविर में शामिल नहीं हो पाए। अकादमी ने शिविर में शामिल प्रत्येक कलाकार को मानदेय के रूप में 50-50 हजार रुपए की राशि प्रदान की जबकि कलाकारों के उदयपुर तक आने-जाने, उनके आवास व भोजन व्यवस्था के साथ उदयपुर भ्रमण की जिम्मेदारी उदयपुर प्रशासन की रही।
लाइफ टाईम अचीवमेंट अवार्ड
इस वर्ष का लाइफ टाईम अचीवमेंट अवार्ड जयपुर के प्रोग्रसिव आर्टिस्ट ग्रुप के अध्यक्ष आर.बी. गौतम को दिया गया इस अवार्ड के लिए उनके नाम का प्रस्ताव पूर्व में लाइफ टाईम अचीवमेंट अवार्ड पाने वाले कलाकार राम जैसवाल और प्रो. सुरेश शर्मा ने रखा।
युवा छात्र कला प्रतियोगिता
ऑन द स्पॉट सम्पन्न हुई युवा छात्र कला प्रतियोगिता में कला मेले के युवा प्रतिभागियों के साथ शहर के महाविद्यालयों से आए छात्र-छात्राओं ने भी बढ़-चढक़र हिस्सा लिया। इसका प्रबंध स्थानीय कलाकार डा. मोहनलाल जाट के जिम्मे था।
पहली बार प्रवेश शुल्क
कला मेले के इतिहास में यह पहला अवसर था जब कला मेले के दर्शकों को प्रवेश शुलक चुकाना पड़ा।ज्ञात हो कि राजीव गांधी पार्क की सार-संभाल हेतु जिला प्रशासन द्वारा ठेके पर दिया गया है। ठेकेदार द्वारा पार्क प्रवेश के लिए प्रति व्यक्ति 5 रुपए शुल्क लिया जाता है जो कला मेले के दर्शकों से भी लिया गया। प्रतिभागी कलाकारों के लिए प्रवेश पास की व्यवस्था की गई। यदि सकारात्मक रूप से सोचें तो भविष्य में भी कला मेले का प्रवेश शुल्क रखा जा सकता है और प्राप्त आय को कला मेले की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए खर्च किया जा सकता है।

कला मेले में उत्कृष्ट कलाकारों को सम्मान

गौतम को लाईफ टाईम अचीवमेंट अवार्ड 
श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए 12 कलाकारों को पुरस्कार
छात्र कला प्रतियोगिता में 5 छात्र हुए पुरस्कृत
मूमल नेटवर्क, (22 November, 2016) उदयपुर। जिला प्रशासन के सहयोग से राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा 17 से 21 नवंबर तक आयोजित 19वें कला मेले का समापन हुआ। समापन अवसर पर उत्कृष्ट कलाकारों को सम्मानित व पुरस्कृत किया गया। इस वर्ष के लाईफ टाईम अचीवमेंट अवार्ड से आर.बी. गौतम को सम्मानित किया गया। सम्मान के रूप में उन्हें स्मृति चिंह, 31 हजार रुपए की नकद धनराशि, शॉल व श्रीफल प्रदान किए गए।
श्रेष्ठ प्रदर्शन हेतु पुरस्कार
कला मेले के प्रतिभागी कलाकारों में से श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए 12 कलाकारों को पुरस्कृत किया गया। इनमें से प्रति कला मेले की तरह इस बार भी 5-5,000 रुपए की राशि से 10 कलाकारों को अकादमी पुरस्कार की प्राप्ति हुई जबकि दो कलाकारों को वरिष्ठ कलाकारों द्वारा नकद राशि का पुरस्कार दिया गया।
अकादमी पुरस्कार से स्टॉल नं. 1 की यामिनी शर्मा को कावड़ कला के लिए, स्टॉल नं. 3 के दिलीप कुमार डामोर को एचिंग के लिए, स्टॉल नं. 16 के मोहन लाल जाट को इंस्टालेशन के लिए, स्टॉल नं. 40 के विजय वर्मा को पेंटिंग के लिए, स्टॉल नं. 51 के राहुल कुमार राजोरिया  तथा अंकित शर्मा को फोटोग्राफी के लिए, स्टॉल नं. 77 में प्रदर्शित इंस्टॉलेशन के लिए उदयपुर की मोहनलाल सुखाडिय़ा यूनिवर्सिटी को,  स्टॉल नं. 29 के मयंक शर्मा को पेंटिंग के लिए, स्टॉल नं. 32 के रवीन्द्र दाहिमा को सेरीग्राफी के लिए तथा स्टॉल नं. 30 की की साक्षी किशोर को कैलीग्राफी के लिए पांच-पांच हजार रुपए की नकद राशि से पुरस्कृत किया गया। इसके साथ स्टॉल नं. 21 की निहारिका राठौड़ को पेंटिंग के लिए पी.एन. चोयल मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा 5000/ का पुरस्कार शैल चोयल ने व स्टॉल नं. 36 की डिम्पल चाण्डात को प्रिंट के लिए डॉ. सुशील निम्बार्क द्वारा 3,000 रुपए की नकद राशि से सम्मानित किया गया। निर्णायक मण्डल के रूप में इन पुरस्कारों के लिए कलाकारों का चयन कला शिविर में आए वरिष्ठ कलाकार अमिताभ दास व हेमराज ने किया।
छात्र कला प्रतियोगिता के विजेता
ऑन द स्पॉट हुई युवा छात्र कला प्रतियोगिता में पांच कलाकारों को अकादमी द्वारा विजेता के रूप में पुरस्कृत किया गया। इनमें से प्रथम पुरस्कार दिव्या निर्मल को 5,000 रुपए, द्वितीय पुरस्कार संदीप मेघवाल को 3,000 रुपए तथा तृतीय पुरस्कार मुकेश कुमार यार्मा को 2,000 रुपए प्रदान किए गए। इसके साथ सांत्वना पंरस्कार के रूप में एक-एक हजार रुपए की राशि राजेश कुमार व चन्द्रिका परमार को प्रदान किए गए।
प्रतियोगिता के निर्णायक मण्डल में वरिष्ठ कलाकार राम जैसवाल, अमिताभ दास व हेमराज थे।
ज्ञात हो कि अकादमी द्वारा पुरस्कार राशि पुरस्कृत कलाकारों के बैंक खाते में ऑनलाईन ट्रांसफर कर दी जाएगी।
पुरस्कृत स्टॉल्स
(छायांकन: डॉ. ललित भारतीय एवं 
 डॉ. मोहन लाल जाट) 


जाट की कृति ; व्यवस्था को
 सजीव करती संरचना
मूमल नेटवर्क,(21 November, 2016) उदयपुर। कला मेले के रंगों में आकर्षण का केन्द्र रहा, उदयपुर के युवा कलाकार डॉ. मोहन लाल जाट का इंस्टॉलेशन। इस कृति की विशेषता रही राजस्थान के ग्रामीण संस्कृति व पारिवारिक व्यवस्था को सजीव करती संरचना।
इस इंस्टॉलेशन में दो कोरे कैनवास को हाथ से बुनी डोरी से लिपटा हुआ दर्शाया गया है। इसके साथ रंग बिरंगे कपड़ों की कतरनों और लहरिया साडिय़ों को लटकाया गया है। यह रंग-बिरंगी कतरने डोरी से गुंथी हुई हैं। इन सब के मध्य में इंस्टॉलेशन का हिस्सा बना एक व्यक्ति खाट पर बैठकर 'डेराÓ के माध्यम से रस्सी बनाने का प्रदर्शन कर दर्शको को एक खास संदेश देता प्रतीत होता है। संदेश यह कि कैनवास युवा पीढ़ी है जिस पर लिपटी हुई डोरी पिता के कृतित्व व व्यक्तित्व द्वारा शिक्षा, सुरक्षा और संरक्षण का आभास दे रही है। साथ में लटकी हुई रंग-बिरंगी कतरने व लहरिया साड़ीयां मॉ सहित परिवार की सभी महिलाओं की ममता और वात्सल्य का भान करा रही है। भारतीय परिवार के ताने-बाने को सजीव करती इस कृति में मोहनलाल के पिता ने स्वयं डोरी कातते हुए इंस्टालेशन का हिस्सा बन कृति को सार्थक कर दिया।

लाइव डेमो देकर  कला की बारीकियों से परिचित कराया

मूमल नेटवर्क, (21 November, 2016) उदयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी के 19वें कला मेले में जहां एक और आयोजित वर्कशॉप में वरिष्ठ अपनी कूचि का कमाल दिखा रहे थे वहीं दो युवा आर्टिस्ट ने लाइव डेमो देकर समां बांध लिया।
कला मेले के तीसरे दिन 19 नवंबर को मोलेला के युवा कलाकार दिनेश चन्द कुम्हार ने टेराकोटा की कृतियां बनाकार उपस्थित युवा कलाकारों व कला प्रेमियों को मोलेला की टेराकोटा कला की बारीकियों से परिचित कराया। उन्होने दर्शकों को प्रोत्साहित करते हुए उनसे भी रचना करवाई। स्कूली बच्चों व दर्शकों ने इसमें बहुत रुचिली।  ज्ञात हो कि दिनेश चन्द टेराकोटा के लिए देश-विदेश में अपनी पहचान बना चुके पद्मश्री मोहनलाल जी के सुपुत्र हैं।
लाइव डेमों का दूसरा 20 नवंबर का दिन  वॉटर कलर को समर्पित रहा। उदयपुर के ही युवा आर्टिस्ट अनुराग मेहता ने वॉटर कलर के प्रयोग से कृति को जीवन्त कर दिया। एक ही समय में जहां वरिष्ठ राम जायसवाल ने वर्कशॉप में वॉटर कलर से अपनी कृति तैयार की वहीं अनुराग मेहता ने भी वॉटर कलर का लाइव डेमो देकर परिपक्य व युवा कूचि के तेजी से आगे बढ़ते कला चरणों को स्थापित किया।

(छायांकन: डॉ. मोहन लाल जाट )


छात्र कला प्रतियोगिता में खुलकर खिलखिलाए रंग


मूमल नेटवर्क, उदयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी आयोजित 19वें कला मेले के चौथे दिन 20 नवंबर को युवा छात्र कला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। ऑन द स्पॉट हुई इस प्रतियोगिता में महाविद्यालय स्तर के कला विद्यार्थियों के साथ कला मेले में भाग ले रह युवा कलाकारों ने भी अपनी कला का कमाल दिखाया। इस प्रतियोगिता में भाग ले रहे युवाओं का उत्साह देखते ही बनता था। कुछ ही देर में खाली ड्राईंग शीट्स पर कलाकारों की सोच के रंगों ने आकृतियों की शक्ल इख्तियार कर ली। इस प्रतियोगिता का संयोजन डॉ. मोहन लाल जाट ने किया।

आज शाम कला मेले के समापन अवसर पर सर्वश्रेष्ठ पांच कलाकारों को पुरस्कृत किया जाएगा। प्रथम तीन को फस्र्ट, सैकिण्ड व थर्ड पुरस्कार के रूप में क्रमश: 5,000 रुपए, 3,000 रुपए एवं 2,000 रुपए के नकद पुरस्कार से तथा शेष दो को सांत्वना पुरस्कार के रूप में एक-एक हजार रुपए की नकद राशि से सम्मानित किया जाएगा। (छायांकन: डॉ. मोहन लाल जाट एवं संदीप कुमार मेघवाल)


आखरी दिन दर्शक मेहरबान हुए

मूमल नेटवर्क, उदयपुर। राजीव गांधी पार्क में चल रहे 19वें कला मेले के चौथे दिन और लेक फेस्टिवल के आखरी दिन दर्शक मेहरबान हुए। लेक फेस्टिवल का समापन कला मेले में दर्शकों को ले आया। दर्शकों के आगमन से कलाकारों में मेले की शांति को लेकर छायी मायूसी काफी हद तक दूर हुई है। दर्शकों की संख्या में बढ़ोतरी का कारण रवीवार का दिन होना भी बताया जा रहा है। अब देखना यह है कि कल यानि सोमवार को कला मेले के अन्तिम दिन कितने दर्शक मेले में आ पाते हैं।

पहली बार प्रवेश शुल्क
राजस्थान ललित अकादमी के कला मेला इतिहास में पहला अवसर है जब दर्शकों को मेले में प्रवेश पाने के लिए शुल्क अदा करना पड़ रहा है। यह शुल्क प्रति व्यक्ति 5 रुपए है। कलाकारों का कहना है कि दर्शकों की कमी का कारण मेले में आने के लिए चुकाया जाने वाला शुल्क भी है। अकादमी द्वारा इस शुल्क की पूर्व में घोषणा नहीं की गई थी। उल्लेखनीय है कि राजीव गांधी पार्क के रखरखाव की जिम्मेदारी जिला प्रशासन द्वारा निजी ठेकेदार को दी हुई है। ठेकेदार द्वारा पार्क में प्रवेश करने के लिए प्रति व्यक्ति 5 रुपए का शुल्क लिया जाता है जो कला मेला देखने आए दर्शकों से भी लिया जा रहा है। जबकि मेले के प्रतिभागियों को प्रवेश पास उपलब्ध करवाए गए हैं।
(छायांकन: डॉ. ललित भारतीय )

...और हो गया अकादमी के प्रदर्शनी वाहन का लोकार्पण

मूमल नेटवर्क, (20 November, 2016) उदयपुर।
19वें कला मेले के उद्घाटन अवसर पर आखिरकार राजस्थान ललित कला अकादमी के प्रदर्शनी वाहन का लोकार्पण हो ही गया। मेले के मुख्य अतिथि जिला कलेक्टर रोहित वर्मा ने प्रदर्शनी वाहन का औपचारिक उद्घाटन किया। वाहन को अकादमी की संग्रहित कृतियों से सजाया गया है।