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20100423

जानें तो मानें

यह तस्वीर राजस्थान के प्रसिद्ध हैरीटेज होटल की है आपको इस जगह का नाम, पता बताना है। सही बताने वाले पहले पांच पाठकों को मूमल की एक वर्ष की सदस्यता उपलब्ध होगी ।

20100419

पावणों की बेकद्री


विश्व में राजस्थान को अतिथि देवो भव: के रूप में पहचाना जाता है। भारत के शेष प्रदेशों में राजस्थान पर्यटन के विकास को मॉडल के रूप में देखा जाता रहा है। उसी राजस्थान की शुष्क मगर स्नेहसिक्त मरू भूमि पर पावणों (पर्यटको) से दुव्र्यवहार अब आम सी बात हो गई है।

जनता द्वारा चुने गए पक्ष-विपक्ष के नेता व्यस्त रहते है। विधानसभा में एक दूसरे को आरोपित करने में। मोटी तन्ख्वाह पाने वाला कर्मचारी वर्ग रहता है अपनी मनमानी करने में। क्षेत्र विशेष के लोगों की राय को दरकिनार करते हुए राजस्थान की पर्यटन नीतियों के साथ खिलवाड़ जहां आम बात है, वहीँ स्मारकों को अपनी खाला का घर समझ कर मनमर्जी की तोड़ फोड़ करना एक प्रशासकीय रिवायत। राजधानी होने के नाते जयपुर को इन सब पीड़ाओं से अधिक रूबरू होना पड़ता है।

शासक और प्रशासक अपने आप में मदमस्त है और इधर जयपुर के होटल्स के बंद कमरों में रखे पर्यटकों के बैग से चोरियां हो रही हैं। हाथी सवारी के नाम पर हो या फिर शोरूमों में खरीददारी के नाम पर हमारे पावणे बदसलूकी का शिकार हो रहे हैं। बेकद्री का आलम इतना बढ़ गया है कि जिस पर्यटन व्यवसाय के चलते राजस्थान को विश्व भर में पहचान मिली है उसे अनाथ सा छोड़ दिया गया है। इस अनाथ हुए पयर्टन पर अब आतंककारियों की नजर भी टिक गई है।

पहले जोधपुर फिर उदयपुर के विश्वख्यात होटल्स को धमकी भरे ईमेल मिल रहे है। और हमारे शासक-प्रशासक किसी की शरारत बता इस महत्ती जिम्मेदारी से मूंह मोडऩे का इशारा दे चुके हैं। हालांकि सम्बन्धित होटल्स के प्रबन्धकों द्वारा अपने स्तर पर सावधानी विशेष व्यक्त का भरसक प्रयास जारी है लेकिन प्रशासकीय अनदेखी के चलते क्या यह पर्याप्त होगा। गौर करें मुम्बई की फिल्म इण्डस्ट्री में आतंक की घुसपैठ और शांति बनाए रखने के लिए निर्माताओं द्वारा आंतकियों से की गई सीक्रेट डीलर्स का खामियाजा भारत भुगत चुका है और कुछ हद तक अभी भी भुगत रहा है।

ठीक इसी तर्ज पर आतंककारी राजस्थान के पर्यटन क्षेत्र में घुसपैठ की फिराक में दिखाई दे रहे हैं। होटल्स प्रबन्धको व मालिकों को भेजी गई ई मेल्स पर खुलमखुल्ला सीक्रेट डीलर्स का निमन्त्रण दिया जा रहा है। और हमारा प्रशासन इसे मात्र शरारत बताकर नजरअन्दाज कर रहा है।सोचिए, मुम्बई की फिल्म इण्डस्ट्री की तरह आतंककारियों का निशाना बनने जा रही यहां की होटल इण्डस्ट्री यदि आतंकी कहर से बचने के लिए उनके द्वारा ऑफर की गई सीक्रेट डीलर्स को स्वीकार करती है तो राजस्थान के पर्यटन व्यवसाय का भविष्य क्या होगा...?

20090624

पर्यटन उद्योग पर पाक कूटनीति का एक और हमला

राजस्थान और हिमाचल प्रदेश का पर्यटन निशाने पर
-राहुल सेन
जयपुर। विश्वव्यापी मंदी और मुंबई पर हुए आतंकवादी हमले की भी मार से जूझ रहे भारतीय पर्यटन उद्योग पर अब पाकिस्तानी कूटनीति का एक और हमला होने जा रहा है, खासकर राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के पर्यटन को निशाने पर रखते हुए किया गया है।
पाकिस्तान ने ठीक पर्यटन सीजन से पहले यह प्रचारित करना शुरू किया है कि तालीबान अब भारत के पश्चिमी और उत्तरी क्षेत्रों में अपने अपने ठिकाने बनाने की तैयारी कर रहा है। पर्यटन उद्योग को पीटने के लिए इससे पहले दिसंबर 2008 में मुंबई के पर्यटकों से भरे ताज होटल पर आतंकवादी हमला हो चुका है, जिसका असर अभी तक उद्योग पर है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह मेहमूद कुरैशी ने 'फाइनेशियल टाइम्स' को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि तालीबान के खिलाफ सैन्य अभियान पूरा करने के बाद उसे फाटा और स्वात घाटी में पुर्ननिर्माण के लिए और अधिक धन चाहिए। अगर आतंकवाद के खिलाफ उसे आर्थिक मदद नही मिली तो तालबान भारत और फारस तक फैल सकता है। भारत में इसके ठिकाने उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्र होंगे।
उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान ओसामा बिन लादेन और तालीबान के आतंक को खत्म करने के नाम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय और विशेषकर अमरीका से भारी मात्रा में आर्थिक मदद प्राप्त कर चुका है। वह यह भी जान चुका है कि जब तक ओसामा नहीं मारा जाता तब तक यह वसूली जारी रखी जा सकती है। तालीबान या ओसाम के अंत के साथ ही यह आर्थिक मदद बंद हो जाएगी।
फिलहाल अमरीका से तालीबान से निपटने के लिए जमकर आर्थिक मदद वसूल रहे पाकिस्तान ने भारत में तालीबान के फैलने का डर दिखाकर कहा है कि आतंकवाद से निबटने के उसे अभी 119 अरब रुपए की जरूरत और है। इससे पाकिस्तान के कूटनितिज्ञों ने एक तीर से दो शिकार करने की कोशिश की है। एक तरफ उन्हें अंतरराष्ट्रीय समूदाय से और अधिक मदद मिल जाएगी साथ ही वे भारत के पर्यटन उद्योग को नुक्सान पहुंचा कर हिस्दुस्तान को आर्थिक नुक्सान पहुंचाया जा सकेगा जो काम अब तक भारत में केवल जाली नोट पहुंचा कर ही किया जाता रहा है।
सब जानते हैं कि भारतीय पर्यटन उद्योग मंदी के दौर से गुजर रहा है। पर्यटन उद्योग पर दिसंबर 2008 में मुंबई पर हुए आतंकवादी हमले की भी मार के बाद पर्यटन उद्योग पर इसका काफी बुरा असर पड़ा। दरअसल पिछले साल अक्टूबर से इस साल मार्च के बीच विदेशी पर्यटकों से होने वाली कमाई में 4।4 फीसदी की कमी आई।